
रांची, 11 दिसंबर 2025: असम में रह रहे आदिवासी समुदायों की आवाज अब झारखंड तक पहुंच चुकी है। आदिवासी समन्वय समिति भारत (असम) के एक प्रतिनिधिमंडल ने आज झारखंड विधानसभा में मुख्यमंत्री श्री हेमन्त सोरेन से मुलाकात की और चाय बगान क्षेत्रों में रहने वाले आदिवासी परिवारों की समस्याओं से उन्हें अवगत कराया।
प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री को बताया कि असम सरकार की उपेक्षा और उदासीन रवैये के कारण वहां का आदिवासी समाज सामाजिक, आर्थिक और शैक्षणिक रूप से लगातार पिछड़ता जा रहा है।
मुख्यमंत्री श्री हेमन्त सोरेन ने प्रतिनिधिमंडल की बातों को गंभीरता से सुना और भरोसा दिलाया कि झारखंड सरकार असम में रह रहे आदिवासी समुदायों के हक, अधिकार और पहचान की रक्षा के लिए ठोस कदम उठाएगी।

मुख्यमंत्री ने कहा —
“असम में रह रहे हमारे आदिवासी भाई-बहनों के सामाजिक, आर्थिक और शैक्षणिक विकास के लिए झारखंड सरकार प्रतिबद्ध है। जल्द ही झारखंड का एक सरकारी प्रतिनिधिमंडल असम दौरे पर जाएगा ताकि वहां की वास्तविक स्थिति का आकलन किया जा सके।”
उन्होंने आगे कहा कि झारखंड सरकार चाय बगानों में काम कर रहे आदिवासियों को अनुसूचित जनजाति (ST) का दर्जा दिलाने की दिशा में भी गंभीर प्रयास कर रही है। साथ ही, उनके दैनिक वेतन में वृद्धि और भूमि से जुड़ी समस्याओं के समाधान के लिए भी ठोस पहल की जाएगी।
यह भी उल्लेखनीय है कि ब्रिटिश शासनकाल में झारखंड से हजारों आदिवासी परिवारों को असम के चाय बागानों में मजदूरी के लिए बसाया गया था, और आज भी वे समाजिक उपेक्षा का सामना कर रहे हैं।
प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन से आग्रह किया कि वे इस संघर्ष का नेतृत्व करें ताकि असम में रह रहे आदिवासी समुदायों की आवाज केंद्र और राज्य सरकारों तक प्रभावी रूप से पहुंच सके।
इस अवसर पर अनुसूचित जनजाति, अनुसूचित जाति एवं पिछड़ा वर्ग कल्याण मंत्री श्री चमरा लिंडा, तथा समिति के प्रमुख सदस्य श्री जीतेन केरकेट्टा, श्री बिरसा मुंडा, श्री तरुण मुंडा, श्री गणेश, श्री अजीत पूर्ति, श्री राजेश भूरी, श्री बाबूलाल मुंडा और श्री मंगल हेंब्रम सहित अन्य सदस्य उपस्थित रहे।



