झारखंड उत्पाद विभाग ने रचा इतिहास: ₹4013 करोड़ का रिकॉर्ड राजस्व, 2700 करोड़ का पुराना रिकॉर्ड टूटा

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रांची, 16 अप्रैल 2026: झारखंड के उत्पाद विभाग ने वित्तीय वर्ष 2025-26 में ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल करते हुए ₹4013.53 करोड़ का रिकॉर्ड राजस्व संग्रह किया है। यह राज्य के इतिहास में अब तक का सबसे अधिक उत्पाद राजस्व है, जिसने पिछले ₹2700 करोड़ के रिकॉर्ड को काफी पीछे छोड़ दिया है।


यह उपलब्धि राज्य की वित्तीय मजबूती की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है। विशेषज्ञों के अनुसार, यह वृद्धि न केवल आर्थिक प्रबंधन का परिणाम है, बल्कि प्रशासनिक सख्ती और आधुनिक तकनीकों के प्रभावी उपयोग का भी उदाहरण है।


📊 प्रशासनिक सख्ती और तकनीकी सुधार का असर


उत्पाद विभाग ने अवैध शराब के निर्माण, परिवहन और बिक्री पर कड़ी कार्रवाई की है। इसके साथ ही लाइसेंसिंग प्रक्रिया में पारदर्शिता लाई गई और डिजिटल ट्रैकिंग सिस्टम को मजबूत किया गया, जिससे शराब की आपूर्ति और बिक्री पर निगरानी अधिक प्रभावी हो सकी।


🚨 अवैध कारोबार पर सख्त कार्रवाई


राज्यभर में अवैध शराब के खिलाफ लगातार अभियान चलाए गए, जिससे राजस्व में हो रहे नुकसान को रोका जा सका। इस सख्ती का सीधा असर राजस्व में वृद्धि के रूप में सामने आया है।


💼 नई उत्पाद नीति बनी गेमचेंजर


नई उत्पाद नीति के तहत लाइसेंस शुल्क और उत्पाद शुल्क में किए गए संशोधन ने भी आय बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई। इसके अलावा शराब दुकानों के संचालन में पारदर्शिता और प्रतिस्पर्धा बढ़ने से भी राजस्व में इजाफा हुआ है।


📈 राज्य के लिए क्यों है खास?


₹4013 करोड़ का यह आंकड़ा न केवल एक रिकॉर्ड है, बल्कि यह झारखंड की आर्थिक स्थिति को मजबूत करने और विकास योजनाओं को गति देने में भी मददगार साबित होगा।

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