
रांची | 18 अप्रैल 2026 विकसित भारत जी ग्राम जी योजना और मनरेगा को लेकर शनिवार शाम आयोजित वर्चुअल कॉन्फ्रेंस (VC) में देशभर के राज्यों के ग्रामीण विकास मंत्रियों ने हिस्सा लिया। इस बैठक की अध्यक्षता केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री Shivraj Singh Chouhan ने की।

इस दौरान झारखंड की ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज मंत्री Deepika Pandey Singh ने राज्य का पक्ष मजबूती से रखते हुए कई महत्वपूर्ण मुद्दे उठाए।

मंत्री दीपिका पांडेय सिंह ने केंद्र सरकार के समक्ष मनरेगा के तहत लंबित भुगतान का मुद्दा प्रमुखता से रखा। उन्होंने बताया कि झारखंड में मैटेरियल मद के 950 करोड़ रुपये, मजदूरी के 300 करोड़ रुपये और प्रशासनिक मद के 36 करोड़ रुपये लंबे समय से बकाया हैं। उन्होंने इनका जल्द भुगतान कराने की मांग की।

उन्होंने कहा कि बकाया भुगतान नहीं होने के कारण ग्रामीण क्षेत्रों में मनरेगा मजदूरों में निराशा और उदासीनता बढ़ रही है।

इसके साथ ही उन्होंने मनरेगा मजदूरी दर बढ़ाने की मांग उठाते हुए कहा कि वर्तमान मजदूरी दर महंगाई के हिसाब से बेहद कम है और इसे बढ़ाना समय की जरूरत है। इस मुद्दे पर देश के अन्य राज्य भी सहमत हैं।

बैठक में “विकसित भारत जी ग्राम जी योजना” को लेकर भी चर्चा हुई। मंत्री ने कहा कि इस योजना को लागू करने से पहले राज्यों से पर्याप्त सलाह-मशविरा नहीं किया गया।
उन्होंने योजना में राज्यों की 40 प्रतिशत हिस्सेदारी को झारखंड जैसे राज्यों के लिए वित्तीय बोझ बताते हुए कहा कि इससे राज्य की आर्थिक स्थिति पर दबाव बढ़ेगा।

मंत्री ने यह भी जानकारी दी कि झारखंड विधानसभा ने मनरेगा योजना को जारी रखने का प्रस्ताव पारित किया है।
इसके अलावा उन्होंने 100 दिनों के बजाय 150 दिनों के रोजगार की गारंटी देने की मांग की। साथ ही 60 दिनों के अवकाश के नियम में छूट देने की भी जरूरत बताई।
उन्होंने चेतावनी दी कि यदि इन नियमों में बदलाव नहीं किया गया, तो ग्रामीण मजदूरों के सामने रोजगार संकट और पलायन की समस्या और बढ़ सकती है।

अंत में मंत्री दीपिका पांडेय सिंह ने केंद्र सरकार से झारखंड के हिस्से की बकाया राशि के शीघ्र भुगतान की मांग दोहराते हुए कहा कि इससे मजदूरों को न्याय मिल सकेगा।