
झारखंड में अनाज गोदामों को लेकर बड़ा विवाद सामने आया है। जदयू के प्रदेश महासचिव और मोटिया-मजदूर संघ के केंद्रीय अध्यक्ष संतोष कुमार सोनी ने दावा किया है कि गोड्डा और चतरा स्थित अनाज गोदामों से लगभग चार करोड़ रुपये का अनाज गायब हो गया है। उन्होंने पूरे मामले में एफसीआई अधिकारियों और संबंधित एजेंसियों की मिलीभगत का आरोप लगाया है।
प्रेस वार्ता के दौरान संतोष कुमार सोनी ने कहा कि गोड्डा स्थित BSWC (बिहार स्टेट वेयरहाउस कॉरपोरेशन) के गोदाम को एफसीआई ने किराये पर लिया हुआ है। यहां से करीब तीन करोड़ रुपये मूल्य का चावल और गेहूं गायब पाया गया।
उनका आरोप है कि इस अनाज को बाजार में बेच दिया गया।
उन्होंने कहा कि अनाज गायब होने के बाद मामले को दबाने की कोशिश की जा रही है। आरोप है कि उसी गोदाम में बाद में सड़ा हुआ अनाज डंप कर दिया गया और अब उसका टेंडर कर एथनॉल बनाने की तैयारी की जा रही है।
संतोष कुमार सोनी ने बताया कि इस मामले में एक मंडल प्रबंधक को निलंबित किया गया है, लेकिन यह कार्रवाई केवल छोटी मछलियों पर की जा रही है जबकि बड़े जिम्मेदार लोगों को बचाया जा रहा है। उन्होंने केंद्र और राज्य सरकार से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है।
उन्होंने यह भी कहा कि गोड्डा गोदाम के संवेदक विद्यापति सिंह हैं। वहीं चतरा में भी करीब एक करोड़ रुपये के अनाज गायब होने का दावा किया गया है। खास बात यह है कि चतरा का गोदाम भी BSWC का है और वहां भी संवेदक विद्यापति सिंह ही बताए जा रहे हैं।
संतोष कुमार सोनी ने सवाल उठाया कि एक ही ठेकेदार के दो अलग-अलग गोदामों से अनाज गायब होना महज संयोग नहीं हो सकता। उन्होंने दावा किया कि उनके पास एफसीआई अधिकारियों की कॉल रिकॉर्डिंग मौजूद है, जिसमें अधिकारी गायब अनाज की रिकवरी के लिए बिहार सरकार को पत्र भेजने की बात कर रहे हैं।
उन्होंने एफसीआई और जेएसएफसी अधिकारियों के गठजोड़ की उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की है। साथ ही चेतावनी दी कि यदि कार्रवाई नहीं हुई तो वे अदालत का दरवाजा खटखटाएंगे।