झारखंडी छात्रों के हक पर हमला? BIT मेसरा के खिलाफ आदिवासी छात्र संघ का बड़ा आंदोलन

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रांची: बीआईटी मेसरा द्वारा झारखंड के स्थानीय छात्र-छात्राओं के लिए निर्धारित 50 प्रतिशत सीट कोटा समाप्त किए जाने के फैसले का विरोध तेज हो गया है। आदिवासी छात्र संघ ने इस निर्णय को झारखंडी युवाओं के भविष्य के खिलाफ बताते हुए इसे तत्काल वापस लेने की मांग की है।


संघ के केंद्रीय अध्यक्ष सुशील उरांव ने जारी प्रेस विज्ञप्ति में कहा कि बीआईटी मेसरा ने अपनी स्थापना से लेकर अब तक झारखंड की भूमि, जल, जंगल और संसाधनों का लाभ उठाया है। ऐसे में राज्य के छात्रों के लिए आरक्षित सीटों को समाप्त करना स्थानीय युवाओं के अधिकारों का हनन है।
उन्होंने आरोप लगाया कि संस्थान ने पूर्व में आदिम जनजाति के विद्यार्थियों के लिए संचालित कई कल्याणकारी योजनाओं को भी बंद कर दिया है। विशेष रूप से पॉलिटेक्निक संस्थान में मिलने वाली निशुल्क शिक्षा व्यवस्था समाप्त कर दी गई है और अब विद्यार्थियों से भारी फीस ली जा रही है।


आदिवासी छात्र संघ ने यह भी दावा किया कि बीआईटी देवघर को भी झारखंड सरकार द्वारा जमीन उपलब्ध कराई गई थी, लेकिन वहां भी स्थानीय हितों को अपेक्षित महत्व नहीं दिया जा रहा है। संघ का कहना है कि संस्थान की भूमि अधिग्रहण और स्थानीय रोजगार नीतियों को लेकर पहले से ही ग्रामीणों और प्रभावित लोगों में असंतोष है।


सुशील उरांव ने कहा कि अब तक संस्थान की कई विसंगतियों को इसलिए नजरअंदाज किया गया क्योंकि यह झारखंड के छात्रों को शिक्षा प्रदान कर रहा था। लेकिन यदि स्थानीय विद्यार्थियों का नामांकन ही प्रभावित होगा तो राज्य के युवाओं का भविष्य संकट में पड़ जाएगा।


आदिवासी छात्र संघ की प्रमुख मांगें


झारखंड के छात्रों के लिए 50 प्रतिशत सीट कोटा तत्काल बहाल किया जाए।
आदिम जनजाति के विद्यार्थियों के लिए निशुल्क शिक्षा व्यवस्था फिर से लागू की जाए।
स्थानीय युवाओं को रोजगार में प्राथमिकता दी जाए।
संस्थान के प्रबंधन में स्थानीय हितों को सुनिश्चित किया जाए।


संघ ने चेतावनी दी है कि यदि बीआईटी मेसरा प्रबंधन अपने फैसले पर पुनर्विचार नहीं करता है तो पूरे झारखंड में चरणबद्ध और उग्र आंदोलन शुरू किया जाएगा।

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