
रांची: आदिवासी छात्र संघ (ACS) और राजी पाड़हा सरना प्रार्थना सभा के संयुक्त प्रतिनिधिमंडल ने गुरुवार को केंद्रीय राज्य मंत्री एवं रांची सांसद संजय सेठ से उनके आवास पर मुलाकात कर परिसीमन और सरना धर्म कोड से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर ज्ञापन सौंपा।
प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व आदिवासी छात्र संघ के केंद्रीय अध्यक्ष सुशील उराँव ने किया। उन्होंने कहा कि झारखंड राज्य का गठन आदिवासियों और मूलवासियों के लंबे संघर्ष का परिणाम है। ऐसे में आगामी परिसीमन के दौरान केवल वर्तमान जनसंख्या के आधार पर अनुसूचित जनजाति (ST) की आरक्षित सीटों में किसी भी प्रकार की कटौती संविधान की पांचवीं अनुसूची और पेसा कानून की भावना के खिलाफ होगी।

रांची विश्वविद्यालय अध्यक्ष मनोज उराँव ने कहा कि झारखंड का आदिवासी समाज विस्थापन और जनसांख्यिकीय बदलाव की दोहरी चुनौती का सामना कर रहा है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि परिसीमन में आदिवासी प्रतिनिधित्व कम किया गया तो संगठन राज्यव्यापी और देशव्यापी आंदोलन शुरू करेगा।
राजी पाड़हा सरना प्रार्थना सभा के राष्ट्रीय महासचिव विद्यासागर केरकेट्टा ने आगामी जनगणना में पृथक सरना धर्म कोड लागू करने की मांग दोहराई। उनका कहना था कि अलग धर्म कोड के अभाव में प्रकृति पूजक आदिवासियों की वास्तविक जनसंख्या का सही आकलन नहीं हो पाता, जिससे उनके अधिकार और योजनाएं प्रभावित होती हैं।
वहीं संगठन के केंद्रीय कोषाध्यक्ष एवं संयोजक डॉ. जलेश्वर भगत ने कहा कि परिसीमन का आधार केवल वर्तमान आबादी नहीं, बल्कि पांचवीं अनुसूची और ऐतिहासिक संवैधानिक संतुलन होना चाहिए।

संगठनों की प्रमुख मांगें
झारखंड की सभी वर्तमान ST आरक्षित विधानसभा और लोकसभा सीटों को सुरक्षित रखा जाए।
सीटें बढ़ने पर आदिवासी प्रतिनिधित्व भी आनुपातिक रूप से बढ़ाया जाए।
अनुसूचित क्षेत्रों में प्रतिनिधित्व तय करने के लिए 1971 की जनगणना के संवैधानिक आधार को बरकरार रखा जाए।
आगामी जनगणना में पृथक सरना धर्म कोड का कॉलम शामिल किया जाए।
सादा पट्टा और आदिवासी जमीनों पर अवैध कब्जों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।
ज्ञापन प्राप्त करने के बाद केंद्रीय राज्य मंत्री संजय सेठ ने प्रतिनिधिमंडल को आश्वस्त किया कि वे इन मांगों को केंद्र सरकार और संबंधित मंत्रालयों के समक्ष गंभीरता से उठाएंगे।
