
रांची: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 80वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर लाल किले से दिए गए संबोधन में ‘दिमागी नक्सल’ शब्द के इस्तेमाल को लेकर राजनीतिक विवाद तेज हो गया है। झारखंड प्रदेश कांग्रेस के प्रवक्ता उज्जवल प्रकाश तिवारी ने प्रधानमंत्री के बयान पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है।
उज्जवल तिवारी ने कहा कि ‘दिमागी नक्सल’ या इस तरह का कोई भी ठप्पा अब लोगों की आवाज को दबाने में काम नहीं आएगा। उन्होंने सवाल उठाया कि देश के पढ़े-लिखे युवाओं को केवल इसलिए ‘नक्सली’ कैसे कहा जा सकता है, क्योंकि वे सरकार से सवाल पूछ रहे हैं और रोजगार तथा शिक्षा जैसे मुद्दों पर जवाब मांग रहे हैं।
कांग्रेस प्रवक्ता ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री का यह बयान सरकार के अहंकार और युवाओं की समस्याओं को हल करने में उसकी नाकामी को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि रोजगार, शिक्षा और युवाओं के भविष्य से जुड़े सवालों का समाधान करने के बजाय असहमति जताने वालों पर लेबल लगाना उचित नहीं है।
तिवारी ने आगे कहा कि प्रधानमंत्री का ‘दिमागी नक्सल’ वाला बयान वास्तव में असहमति की आवाजों को दबाने की कोशिश है। उनके मुताबिक, युवाओं के वास्तविक मुद्दों से ध्यान भटकाने के बजाय सरकार को रोजगार और शिक्षा के सवालों पर जवाब देना चाहिए।
झारखंड प्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता ने कहा कि लोकतंत्र में सरकार से सवाल पूछना नागरिकों का अधिकार है और असहमति की आवाज को किसी विशेष ठप्पे के जरिए दबाया नहीं जाना चाहिए।