299.175 तो दिखा दिया, 110 का हिसाब कौन बताएगा ?

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299.175 का सवाल, 220 का हिसाब और चयन की पूरी तस्वीर—आखिर सच क्या है?

PGT विवाद में मंजू नाम की अभ्यर्थी का मामला सोशल मीडिया पर चर्चा में है। मंजू के 300 में 299.175 Normalised Marks को सामने रखते हुए सवाल पूछा जा रहा है—

“299.175 अंक लाने के बावजूद मेरा चयन नहीं हुआ, तो आखिर चयन किसका हुआ और किसका हो रहा है?”

सवाल अपनी जगह महत्वपूर्ण है, लेकिन इसका जवाब केवल एक आंकड़े से नहीं, बल्कि पूरी चयन प्रक्रिया के तथ्यों से मिलना चाहिए।



सबसे पहले एक तथ्य स्पष्ट है—मंजू का नाम 2nd DV List में प्रकाशित हो चुका है, हालांकि अंतिम चयन अभी शेष है। इसलिए वर्तमान स्थिति को सीधे “मंजू का चयन नहीं हुआ” कहना भी पूरी तरह सटीक नहीं होगा।

दूसरा महत्वपूर्ण तथ्य स्वयं मंजू द्वारा सोशल मीडिया पर बताया गया 150 में 110 प्रश्न सही होने का दावा है, जिसका साक्ष्य भी उपलब्ध है।

परीक्षा में प्रत्येक प्रश्न 2 अंक का था और अधिकतम Raw Marks 300 थे। इस आधार पर 110 सही उत्तरों का Raw Score 220 अंक बनता है।

अब यहां Normalisation को समझना जरूरी है। 299.175 Normalised Score को सीधे 220 Raw Score से तुलना नहीं की जा सकती, क्योंकि Normalisation अलग-अलग शिफ्टों के कठिनाई स्तर के अंतर को समायोजित करने की प्रक्रिया है। इसलिए Normalised Score और Raw Score को एक ही पैमाने पर समझना उचित नहीं होगा।



इसीलिए असली सवाल यह होना चाहिए—

मंजू के 110 सही उत्तर और 220 Raw Score से 299.175 Normalised Score किस प्रक्रिया के तहत बना? और जिन अभ्यर्थियों का चयन हुआ या हो रहा है, उनके Raw Score, Normalised Score, Merit Rank और चयन श्रेणी क्या है?

यही तुलनात्मक और आधिकारिक आंकड़े पूरी तस्वीर स्पष्ट कर सकते हैं।

«299.175 की चर्चा खूब हुई,
220 का हिसाब भी सामने हो।
सवाल सिर्फ एक का क्यों हो,
पूरी मेरिट का जवाब भी हो।»

मंजू के प्रति सहानुभूति रखना स्वाभाविक है, लेकिन सहानुभूति को चयन प्रक्रिया का प्रमाण नहीं माना जा सकता। इसी तरह किसी अभ्यर्थी के खिलाफ धारणा बनाना भी उचित नहीं होगा।

मुद्दा मंजू नहीं, बल्कि चयन प्रक्रिया की पारदर्शिता है।

इसलिए 299.175 का स्कोर देखिए, 110 सही उत्तरों का साक्ष्य भी देखिए, 2nd DV List भी देखिए, और साथ ही चयनित अभ्यर्थियों का पूरा आधिकारिक डेटा भी सामने रखिए।

न किसी के पक्ष में जल्दबाजी, न किसी के खिलाफ निष्कर्ष—पहले पूरा तथ्य, फिर राय।

तभी स्पष्ट होगा—चयन किसका हुआ और किसका हो रहा है।

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