
झारखंड लोक सेवा आयोग यानी JPSC परीक्षा में कथित गड़बड़ी के मामले में जेल में बंद पूर्व मुख्य सचिव और JPSC के पूर्व अध्यक्ष एल ख्यांग्ते की जमानत याचिका पर बुधवार को CID की विशेष अदालत में सुनवाई हुई। मामले में बचाव पक्ष और CID, दोनों की ओर से दलीलें पूरी हो गईं। इसके बाद अदालत ने जमानत याचिका पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया।
सुनवाई के दौरान ख्यांग्ते की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अनिल कुमार और अधिवक्ता चंदना कुमारी ने पक्ष रखा। बचाव पक्ष ने अदालत में दलील दी कि एल ख्यांग्ते के खिलाफ कोई ठोस साक्ष्य नहीं है। छापेमारी के दौरान भी उनके खिलाफ कोई आपत्तिजनक सबूत बरामद नहीं हुआ। उनकी ओर से गिरफ्तारी को भी अवैध बताया गया।
वहीं, CID ने जमानत का विरोध करते हुए ख्यांग्ते की भूमिका को गंभीर बताया। जांच एजेंसी के मुताबिक, TDPL को परीक्षा आयोजन का काम सौंपने में एल ख्यांग्ते की भूमिका रही थी। CID का आरोप है कि TDPL की ओर से आयोजित परीक्षाओं में पारदर्शिता नहीं बरती जा रही थी और इसकी जानकारी ख्यांग्ते को थी, लेकिन इसके बावजूद उन्होंने कोई कार्रवाई नहीं की।

इस मामले में पिछली सुनवाई के दौरान CID ने अदालत में केस डायरी भी पेश की थी।
बता दें कि CID ने एल ख्यांग्ते को 10 अगस्त 2026 को गिरफ्तार किया था। जांच के दौरान उन पर TDPL से कथित तौर पर 2 करोड़ रुपये कमीशन लेने का आरोप भी सामने आया है। हालांकि, ये सभी आरोप जांच का हिस्सा हैं और अदालत में इनका अंतिम रूप से साबित होना बाकी है।
JPSC परीक्षा में कथित अनियमितता को लेकर CID ने कांड संख्या 16/2026 दर्ज किया है। इसी मामले की जांच के दौरान ख्यांग्ते की गिरफ्तारी हुई थी। गिरफ्तारी के बाद उन्हें रिमांड पर लेकर पूछताछ की गई और इसके बाद से वह जेल में बंद हैं।

CID के मुताबिक, इस मामले में अब तक 20 से अधिक लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है। वहीं, मामले में कथित किंगपिन अभय तिवारी के स्वीकारोक्ति बयान का भी जिक्र सामने आया है। CID के अधिकारियों के समक्ष दिए गए कथित बयान में अभय तिवारी ने एल ख्यांग्ते की भूमिका का उल्लेख किया है और TDPL को परीक्षा आयोजन की एजेंसी के तौर पर चयनित किए जाने में उनकी अहम भूमिका होने का दावा किया है।
अब सभी की नजरें अदालत के फैसले पर हैं कि एल ख्यांग्ते को जमानत मिलती है या उन्हें जेल में ही रहना होगा।