
रांची: झारखंड में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर को लेकर सियासत तेज हो गई है। झारखंड मुक्ति मोर्चा के महासचिव विनोद कुमार पांडेय ने भाजपा प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू के आरोपों पर पलटवार करते हुए भाजपा पर गंभीर आरोप लगाए हैं।
विनोद पांडेय ने कहा कि भाजपा को मतदाता सूची के पुनरीक्षण की प्रक्रिया पर सवाल उठाने का नैतिक अधिकार नहीं है। उन्होंने दावा किया कि भाजपा के बीएलए-2 और कई कार्यकर्ताओं को गोड्डा, गढ़वा समेत विभिन्न जिलों में एसआईआर प्रक्रिया में कथित गड़बड़ी करते हुए आम लोगों ने पकड़ा था और कुछ मामलों में एफआईआर भी दर्ज हुई है।
उन्होंने आरोप लगाया कि अब भाजपा बौखलाहट में एसआईआर पर सवाल उठाकर एक विशेष समुदाय को निशाना बना रही है। पांडेय ने भाजपा से सवाल किया कि वह निर्वाचन आयोग की संवैधानिक प्रक्रिया पर सवाल उठा रही है या फिर राजनीतिक लाभ के लिए भ्रम पैदा कर रही है।
जेएमएम महासचिव ने कहा कि यदि भाजपा के पास एसआईआर में किसी तरह की गड़बड़ी से जुड़े प्रमाण हैं, तो उन्हें निर्वाचन आयोग और संबंधित अधिकारियों के समक्ष प्रस्तुत करना चाहिए।
उन्होंने कहा कि मतदाता सूची का पुनरीक्षण निर्वाचन आयोग की देखरेख में होने वाली संवैधानिक प्रक्रिया है। किसी व्यक्ति का नाम जोड़ने या हटाने के लिए निर्धारित नियम और दस्तावेजी प्रक्रिया होती है। यदि कहीं गड़बड़ी सामने आती है तो संबंधित अधिकारियों और निर्वाचन तंत्र के समक्ष शिकायत दर्ज कराने का प्रावधान है।

संथाल परगना को लेकर भाजपा नेताओं के बयानों पर भी विनोद पांडेय ने आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि मतदाता सूची में नाम, उम्र या पते से जुड़ी किसी त्रुटि को सीधे बांग्लादेशी घुसपैठ से जोड़ना उचित नहीं है। यदि कोई व्यक्ति फर्जी दस्तावेज के आधार पर मतदाता सूची में नाम जुड़वाने का प्रयास करता है, तो उसके खिलाफ कानून के तहत कार्रवाई होनी चाहिए, लेकिन कुछ मामलों के आधार पर पूरे समुदाय को संदेह के घेरे में रखना गलत है।
विनोद पांडेय ने भाजपा से यह भी पूछा कि जिन मामलों का वह उल्लेख कर रही है, उनमें निर्वाचन आयोग या सक्षम प्रशासन ने क्या निष्कर्ष दिया है। उन्होंने कहा कि केवल आरोप लगा देने से कोई व्यक्ति अपात्र या मतदाता सूची गलत साबित नहीं हो जाती।
उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा एसआईआर जैसे संवेदनशील विषय को राजनीतिक रंग देकर समाज में भ्रम और अविश्वास पैदा करना चाहती है। साथ ही उन्होंने कहा कि झामुमो लोकतांत्रिक प्रक्रिया की पारदर्शिता और मतदाताओं के अधिकारों के प्रति प्रतिबद्ध है। किसी भी वास्तविक गड़बड़ी की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए, लेकिन राजनीतिक आरोपों के आधार पर लाखों मतदाताओं की निष्ठा पर सवाल नहीं उठाया जा सकता।