रांची के आलम हॉस्पिटल पर आयुष्मान कार्ड से इलाज नहीं करने का आरोप, प्रबंधन ने दी सफाई

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रांची: झारखंड की राजधानी रांची के बरियातू स्थित आलम हॉस्पिटल में आयुष्मान कार्ड से इलाज को लेकर विवाद सामने आया है। बोकारो निवासी जावेद अंसारी ने अस्पताल प्रबंधन पर आयुष्मान कार्ड के जरिए इलाज की सुविधा मिलने की बात कहकर अपनी मां को भर्ती करने और बाद में इलाज से इनकार करने का आरोप लगाया है। वहीं, अस्पताल प्रबंधन ने इन आरोपों पर अपना पक्ष रखते हुए इलाज की प्रक्रिया और आयुष्मान योजना के नियमों का हवाला दिया है।

क्या है पूरा मामला?

मिली जानकारी के अनुसार, बोकारो जिले के निवासी जावेद अंसारी अपनी मां शरीफून खातून का इलाज कराने के लिए रांची के बरियातू स्थित आलम हॉस्पिटल पहुंचे थे। जावेद का आरोप है कि अस्पताल में भर्ती कराने से पहले उन्होंने आयुष्मान कार्ड के माध्यम से इलाज की सुविधा के बारे में जानकारी ली थी। उनका कहना है कि आयुष्मान कार्ड से इलाज होने की बात पर भरोसा करने के बाद ही उन्होंने अपनी मां को अस्पताल में भर्ती कराया।

परिजनों के मुताबिक, भर्ती के बाद ऑपरेशन के लिए उनसे 1 लाख 20 हजार रुपये की मांग की गई। जावेद अंसारी का आरोप है कि जब उन्होंने आयुष्मान कार्ड के तहत इलाज करने की बात कही, तो अस्पताल प्रबंधन ने इस सुविधा के माध्यम से इलाज करने से इनकार कर दिया।

जावेद का कहना है कि उनकी आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण वे इतनी बड़ी रकम की व्यवस्था नहीं कर सके। इसके चलते उनकी मां का ऑपरेशन नहीं हो पाया और बाद में मरीज को अस्पताल से डिस्चार्ज कर दिया गया।

अस्पताल प्रबंधन ने क्या कहा?

मामले में आलम हॉस्पिटल प्रबंधन ने अपनी सफाई देते हुए कहा है कि मरीज के परिजनों को आयुष्मान कार्ड के तहत इलाज की शर्तों के बारे में पहले ही जानकारी दे दी गई थी। प्रबंधन के अनुसार, परिजनों को बताया गया था कि यदि मरीज को ऑपरेशन की जरूरत पड़ती है, तो आयुष्मान कार्ड के माध्यम से इलाज किया जाएगा।

अस्पताल प्रबंधन का दावा है कि यदि मरीज का इलाज बिना ऑपरेशन के किया जाता है, तो उस उपचार का खर्च परिजनों को स्वयं वहन करना होगा। प्रबंधन के मुताबिक, मरीज की नाजुक स्थिति को देखते हुए ऑपरेशन के बजाय कंजर्वेटिव ट्रीटमेंट यानी बिना ऑपरेशन के उपचार का विकल्प अपनाया गया।

आयुष्मान योजना के पैकेज का दिया हवाला

अस्पताल प्रबंधन का कहना है कि आयुष्मान भारत योजना के तहत संबंधित कंजर्वेटिव ट्रीटमेंट निर्धारित उपचार पैकेज में शामिल नहीं है। इसी वजह से इस उपचार का बिल आयुष्मान कार्ड के माध्यम से कवर नहीं किया जा सकता।

हालांकि, इस मामले में मरीज की पात्रता, संबंधित उपचार पैकेज और योजना के तहत मिलने वाली वास्तविक सुविधा की स्वतंत्र पुष्टि होना अभी आवश्यक है।

आरोपों के बीच उठ रहे सवाल

इस पूरे मामले में मरीज के परिजनों और अस्पताल प्रबंधन के दावों में अंतर सामने आया है। एक ओर परिजन आयुष्मान कार्ड से इलाज की सुविधा का भरोसा मिलने के बाद भर्ती कराने की बात कह रहे हैं, वहीं दूसरी ओर अस्पताल प्रबंधन का दावा है कि इलाज की शर्तें पहले ही स्पष्ट कर दी गई थीं।

अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि संबंधित उपचार आयुष्मान भारत योजना के किस पैकेज के अंतर्गत आता है और मरीज के मामले में योजना के नियमों के अनुसार कौन-सी सुविधाएं उपलब्ध थीं।

नोट: फिलहाल इस मामले में दोनों पक्षों के दावे सामने आए हैं। आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि और संबंधित अधिकारियों की प्रतिक्रिया मिलने के बाद ही पूरे मामले की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

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