जनजाति सुरक्षा मंच राँची जिला ईकाई द्वारा राजभवन के समक्ष आदिवासियों के साथ हो रहे अन्याय के खिलाफ राजभवन के समक्ष एक दिवसीय धरना प्रदर्शन का कार्यक्रम रखा गया। धरना का मुख्य उदेश्य जनजाति समाज से धर्मांतरित लोगों को जनजाति की सूची से हटाने यानि डी-लिस्टिंग करने के लिए झारखण्ड सरकार से मांग किया गया।

झारखंड आदिवासी सरना विकास समिति के अध्यक्ष एवं जनजाति सुरक्षा मंच के प्रदेश प्रवक्ता मेघा उरांव ने कहा कि 24 दिसंबर 2023 को हुए डी-लिस्टिंग उलगुलान महारैली से धर्मांतरित लोगों की नींद तो हराम हुई है यहां तक की 25 दिसंबर को बड़ा दिन भी ठीक से नहीं मना सके. जब-जब ईसाइयों पर संकट आता है तब-तब आदिवासी एकता और सरना और ईसाई भाई-भाई का याद आने लगता है। हम लोगों के ऊपर समाज को बांटने और लड़वाने का आरोप लगाने वाले चर्च और चर्च के दलाल लोगों को कहना चाहता हूं की समाज को बाँटने और लड़ाने का काम हम लोगों का नहीं बल्कि चर्च मिशनरियों का है. आदिवासियों का धार्मिक पूजा स्थल सरना को जलाने टुकड़े-टुकड़े करने मिटाने नष्ट भ्रष्ट करने वाला ईसाई, भाई से भाई को लड़वाने वाला ईसाई, समाज के बीच नफरत का बीज बोने वाला ईसाई, आदिवासियों को छल कपट से धर्मांतरण कराने वाला ईसाई, आदिवासियों का आस्था और विश्वास को भूत प्रेत और शैतान की पूजा कहने वाला ईसाई, आदिवासियों का तो कोई धर्म ही नहीं है कहने वाला ईसाई, आदिवासियों को असभ्य और हड़िया दारु पीने वाला कहकर अपमानित करने वाला ईसाई, चाला बच्चो यानी सरना माता को दुष्ट आत्मा कहने वाला ईसाई, आदिवासियों का सामाजिक, धार्मिक जमीनों पर अतिक्रमण करने वाला ईसाई, भगवान बिरसा मुंडा को जेल भेजवाने वाला ईसाई, पत्थरगढ़ी के नाम से अलग देश अलग संविधान आधार कार्ड, वोटर कार्ड, राशन कार्ड को बहिष्कार करनेवाले ईसाई. 1970 में भी कार्तिक उरांव जी के द्वारा उठाए गए विषय को विरोध करने वाला ईसाई, 4 फरवरी 2024 को रांची मे डीलिस्टिंग का विरोध करने वाला भी ईसाई. ये सारा के सारा फसाद और विवाद का जड़ है ईसाई. अब समय बदल गया है समाज जाग चुका है. डीलिस्टिंग तो हो के ही रहेगा।

अपनी रूढ़ि परम्परा मानने वाले आदिवासियों के साथ हो रहे अन्याय के खिलाफ जनजाति सुरक्षा मंच वर्षो से लड़ते आया है। अभी तक बहुत से सुविधाओं का धर्मांतरित लोगों द्वारा उपभोग किया जाता रहा है जो आर्थिक और शैक्षणिक दृष्टि ये अपनी रूढ़ि परम्परा मानने वाले आदिवासियों की तुलना में काफी कुछ अच्छे स्थिति में है।
जनजाति सुरक्षा मंच के क्षेत्रीय संयोजक संदीप उरांव ने कहा कि 5वीं अनुसूची के अन्तर्गत विभिन्न अधिनियमों का उल्लंघन करके जनजाति समाज के अधिकारों को समाप्त करने की सोची-समझी साजिश चल रही है. हम सरकार से मांग करते हैं कि 5वीं अनुसूची क्षेत्र में गिरजाघर और कब्रिस्तान भूमि का उच्च स्तरीय जांच हो साथ ही 5वीं अनुसूची क्षेत्र में वक्फ बोर्ड द्वारा चिन्हित भूमि की भी जांच हो. मूल जनजाति समाज का हक मारकर विभिन्न सरकारी पदों पर आसीन धर्मांतरित लोगों की जांच हो. विधानसभा में जनजाति समस्याओं के उपर निगरानी हेतु एक कमिटि गठित हो।
प्रान्त संयोजक हिंदूवा उरांव ने कहा कि जो ईसाइ धर्मांतरित हो गए हैं और अपने धर्म आस्था, विश्वास, रूढ़ी प्रथा, पूजा पद्धति छोड़कर ईसाई बन गए हैं, वैसे लोगों को चिन्हित करके हम सरकार से मांग करते हैं की उन्हें डिलिस्ट किया जाय. जिस तरह सरना कोड के लिए विधानसभा में विशेष सत्र बुलाकर उसे पारित करके भारत सरकार को भेजा है, उसी तरह डी -लिस्टिंग की मांग को भी विधानसभा में विशेष सत्र बुलाकर पारित किया जाए।
जनजाति सुरक्षा मंच के मीडिया प्रभारी सोमा उराँव ने कहा कि जनजाति नेता एवं लोकसभा सदस्य/केन्द्रीय मंत्री स्व. कार्तिक उराँव जी द्वारा तत्कालीन प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गाँधी को 1970 में एक आवेदन दिया गया था. उस आवेदन को न तो लोकसभा के पटल पर रखा गया था, ना ही उसको ख़ारिज किया गया था, बल्कि उसको ठंडे बस्ते में डाल दिया गया. 348 लोकसभा सदस्यों के हस्ताक्षरों से युक्त उस आवेदन के सम्बन्ध में आज हम सरकार को पुनः याद दिलाना चाहते हैं।
उन्होंने कहा कि पाकिस्तान देश से भी खतरनाक है ईसाई. ईसाई द्वारा 1000 सालो से योजना बनाकर जनजातियों की धर्म-संस्कृति-परम्परा रीति-रिवाज, रूढ़ी प्रथा को पूर्ण रूप से नष्ट कर, धर्मांतरण कराकर ईसाई बनाना है. साथ ही साथ मौका मिलते ही झारखण्ड राज्य को ईसाई राज्य बनाने के फ़िराक में ईसाई लगे हुए हैं. इसे जनजाति समाज को बहुत ही सावधान/जागरूक रहना होगा, नहीं तो आनेवाले दिनों में जनजातियों को समाप्त करने में बहुत दिन नहीं लगेंगे।
जनजाति सुरक्षा मंच के प्रदेश युवा संयोजक सन्नी उरांव ने कहा की डीलिस्टिंग की मांग का विरोध करने वाले लोग कभी भी ईसाई मिशनरियों द्वारा हो रहे धर्मांतरण और ईसाई मिशनरियों द्वारा आदिवासियों के जमीनों पर कब्जा किया गया है उसपर नहीं बोलते हैं. धर्मांतरित ईसाई और उनके दलाल डीलिस्टिंग के डर से आज एकता की बात कर रहे हैं जो हास्यादपद है. डीलिस्टिंग का विरोध करने वाले लोग नहीं चाहते कि आदिवासियों को उनका वाजीब अधिकार मिले।
इस महाधरना में जनजाति सुरक्षा मंच के महिला प्रमुख अंजली लकड़ा, रवि मुण्डा, प्रदीप लकड़ा, अशोक मुण्डा, राजू उराँव, अजय भोगता, बलवंत तिर्की, जयमंत्री उराँव, विश्वकर्मा पाहन, विकास उराँव, साजन मुण्डा, मनोज भगत, रोशनी खलखो सहित बड़ी संख्या में विभिन्न आदिवासी संगठन के लोग उपस्थित थे।
