झारखंड आंदोलनकारी संघर्ष मोर्चा की विशेष बैठक पुराना विधानसभा विधायक क्लब के प्रथम तल्ला के सभागार में हुई। बैठक में निर्णय हुआ कि राज्य सरकार झारखंड आंदोलनकारियों को राजकीय मान सम्मान, अलग पहचान, सम्मान पेंशन 50-50 हजार रु देने एवं रोजी रोजगार एवं नियोजन -में 90% की गारंटी , जीते जी झारखंड आंदोलनकारी का चिन्हतीकरण नहीं करती हैं तो आंदोलनकारी 09 मार्च 2024 को झारखंड आर्थिक नाकेबंदी करने तथा जरूरत पड़ी तो संसदीय रास्ते पर भी चलेंगे। जो आंदोलनकारी की बात करेगा वही झारखंड में राज करेगा. आंदोलनकारी सरकार आंदोलनकारियों को राजकीय मान- सम्मान दे।

संघर्ष मोर्चा के संस्थापक व प्रधान सचिव पुष्कर महतो ने कहा कि राज्य की आंदोलनकारी सरकार झारखंड आंदोलनकारी को राजकीय मान सम्मान अलग पहचान सम्मान पेंशन 50-50 हजार रु दिन, रोजी रोजगार नियोजन का गारंटी के साथ 100% गारंटी करें. सरकार झारखंड अलग राज्य के आंदोलनकारी के संघर्ष के मूल्यों को स्थापित करने की दिशा में काम करें सरकार झारखंड के अमरपुर गांव के सपना बेहतर राज्य समृद्ध एवं खुशहाल झारखंड की परिकल्पना को साकार करें.

आंदोलनकारी जाति -पार्टी की भावनाओं से ऊपर उठकर बेहतर राज्य बनाने का संघर्ष करने एलान करे. झारखंड की सांझी संस्कृति के विरासत को खंडित करने वाली ताकतों को उखाड़ फेके. झारखंड आंदोलनकारी अपने स्वाभिमान की रक्षा के लिए बोल बच्चन के अधिकारों के लिए संघर्ष तेज करें. बैठक की अध्यक्षता उपाध्यक्ष जितेंद्र सिंह , संचालन स्टिफ़न किंडो व धन्यवाद ज्ञापन बद्री सिंह ने की. बैठक में बालकिशुन उरांव उपाध्यक्ष, बिकेश शुक्ला पलामू प्रमंडलीय अध्यक्ष, रोजलीन तिर्की दक्षिणी छोटानागपुर प्रमंडलीय अध्यक्ष, विदेशी महतो उतरी छोटानागपुर प्रमंडलीय अध्यक्ष, जिदन कोल को संथाल परगना प्रमंडलीय अध्यक्ष, राजू दास, असमान सुन्डी, विश्वजीत प्रमाणिक, शिबू कालि मैती, सुभाष सिंह, मिहिर तिवारी को कोल्हान प्रमंडलीय संयोजक, दिनेश राम रांची जिला अध्यक्ष, विनोद बडाइक सिमडेगा, कालेश्वर सोरेन-दुमका ,किंकर चौहान -गोडा ,मेरी टुडू- साहिबगंज, बृजेश ठाकुर प्यारेलाल रावत , राजेंद्र हेंब्रम ,प्रभु रवानी-देवघर जिला प्रभारी, राम जी भगत – पाकुड़ ,नारायण मंडल जामताड़ा , राजदेव महथा- बोकारो , सीताराम उरांव को गुमला का अध्यक्ष बनाये गए।

इस मौके पर विदेशी महतो, जितेंद्र सिंह,अली हसन,सतीश कुमार,रोजलीन तिर्की,जिदान कोल, मुरलीधर प्रसाद, सीताराम उरांव, सूरज देव भगत, भुवनेश्वर केवट, बुधन कोल, बद्री सिंह, कार्तिक महथा, राजू दास, खोरस केरकेट्टा, विजय सिंह, भीमसेन संगा, बिकेश शुक्ला, सुजात टोप्पो, पुष्पा बरदेवा, सुभाष सिंह, दाऊद केरकेट्टा,बिनोद बडाइक, दिवाकर साहू, मस्कल्यान, मांझों महतो, सहदुल मंसूरी, प्रदीप सिन्हा, ढुंढे प्रधान,संतोष सिंह, ब्रजेश पांडेय, रतिया इदवार, इसरार अंसारी, सिकंदर राम, ध्रुव नारायण पासवान, दर्शन गनझु, जगदीश लकडा, जुबैर अंसारी, हबुलाल गोराई, वी के वर्मा, बरनीदित लकडा, आयता उरांव, भोला नाथ सिंह, सुमंत सांगा, दीपक टाइगर, लालू बेदिया, लुइशा लकडा, किरण लकडा, प्रतिमा कुजूर, जितवाहन बडाइक, भुखला लोहरा, लुइसा लकडा, प्रभा मिंज सहित अन्य बड़ी संख्या में आंदोलनकारी उपस्थित थे।
