
रांची: झारखंड में विभिन्न मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे छात्रों के मामले में राज्य सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के निर्देश पर आंदोलनरत छात्रों से बातचीत और उनकी मांगों पर विचार करने के लिए चार सदस्यीय मंत्रिमंडलीय समिति गठित करने का निर्णय लिया गया है। यह समिति छात्रों से वार्ता कर उनकी मांगों का अध्ययन करेगी और अपनी रिपोर्ट मुख्यमंत्री को सौंपेगी।

प्रस्तावित समिति में उच्च एवं तकनीकी शिक्षा मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू, ग्रामीण विकास मंत्री दीपिका पांडेय सिंह, समाज कल्याण मंत्री चमरा लिंडा और श्रम मंत्री संजय प्रसाद यादव शामिल होंगे। समिति की कार्यवाही को सुचारु रूप से संचालित करने के लिए अपर मुख्य सचिव (स्वास्थ्य) अजय कुमार को भी इसमें शामिल किया गया है।
सरकार की ओर से बताया गया है कि समिति आंदोलनरत छात्रों से सीधे मुलाकात कर उनकी मांगों पर विस्तार से चर्चा करेगी और समाधान के लिए अपनी अनुशंसाएं मुख्यमंत्री को देगी।
इससे पहले सरकार ने छात्रों से प्रारंभिक वार्ता के लिए एसडीओ और एडीएम (लॉ एंड ऑर्डर) को धरना स्थल भेजा था। वहीं, मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने बुधवार को राज्यपाल संतोष गंगवार से भी मुलाकात की, जिसमें छात्र आंदोलन और उससे जुड़े मुद्दों पर चर्चा हुई।

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा कि पेपर लीक का मुद्दा केवल झारखंड तक सीमित नहीं है, बल्कि यह देश के कई राज्यों के युवाओं के सामने एक गंभीर राष्ट्रीय चुनौती बन चुका है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार इस मामले में पूरी गंभीरता से काम कर रही है। संबंधित एजेंसियां लगातार जांच कर रही हैं और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करते हुए उन्हें जेल भी भेजा गया है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार का उद्देश्य केवल जांच करना नहीं, बल्कि युवाओं को ठोस समाधान उपलब्ध कराना है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि सरकार के दरवाजे सभी छात्रों और अभ्यर्थियों के लिए हमेशा खुले हैं। जिनकी भी कोई मांग या सुझाव है, वे अपनी बात सरकार के समक्ष रख सकते हैं और उनकी प्रत्येक बात को गंभीरता से सुना जाएगा।
