
रांची: डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी विश्वविद्यालय (DSPMU) में विभिन्न रोजगारपरक और जनजातीय-क्षेत्रीय भाषा पाठ्यक्रमों की सीटों में प्रस्तावित कटौती का विरोध तेज हो गया है। आदिवासी छात्र संघ (DSPMU) के अध्यक्ष विवेक तिर्की के नेतृत्व में छात्र प्रतिनिधिमंडल ने गुरुवार को कुलपति से मुलाकात कर ज्ञापन सौंपा और सीटों में कटौती का कड़ा विरोध जताया।
विवेक तिर्की ने कहा कि कुड़ुख, संथाली, मुंडारी, हो, खड़िया, खोरठा, कुरमाली, नागपुरी, पंचपरगनिया सहित जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा विभागों के अलावा बीबीए, एमबीए, कंप्यूटर विज्ञान और वाणिज्य संकाय की सीटें कम करने का प्रस्ताव छात्र हित के खिलाफ है। उन्होंने वर्तमान सीटों को यथावत रखने और जरूरत के अनुसार सीटें बढ़ाने की मांग की।
उन्होंने कहा कि हर वर्ष इन पाठ्यक्रमों में बड़ी संख्या में छात्र आवेदन करते हैं। ऐसे में सीटों में कटौती होने से ग्रामीण, आदिवासी और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के छात्र सबसे अधिक प्रभावित होंगे और कई योग्य विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा से वंचित होना पड़ेगा।
आदिवासी छात्र संघ ने विश्वविद्यालय प्रशासन से यूजी और पीजी नामांकन प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी, मेरिट आधारित और समयबद्ध बनाने की भी मांग की। साथ ही मेरिट लिस्ट, कट-ऑफ, खाली सीटों और स्पॉट एडमिशन से जुड़ी सभी जानकारियां विश्वविद्यालय की आधिकारिक वेबसाइट पर सार्वजनिक करने, शिकायत निवारण तंत्र स्थापित करने और नामांकन प्रक्रिया की निगरानी के लिए प्रभावी व्यवस्था बनाने की मांग की।
संघ ने उम्मीद जताई कि कुलपति छात्रहित को प्राथमिकता देते हुए सीट कटौती के प्रस्ताव पर पुनर्विचार करेंगे और सभी मांगों पर सकारात्मक निर्णय लेंगे।
