डोरंडा में अतिक्रमण पर सख्ती, ईदगाह–उर्स मैदान के पास बुलडोजर तय ।

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रांची के डोरंडा इलाके में प्रशासन और अतिक्रमणकारियों के बीच टकराव की स्थिति बन गई है। ईदगाह और उर्स मैदान के आसपास वर्षों से चले आ रहे अतिक्रमण को लेकर अब प्रशासन सख्त रुख अपनाए हुए है। सड़क किनारे चल रहे खटाल, कबाड़खाने और अवैध दुकानों पर बुलडोजर कार्रवाई लगभग तय मानी जा रही है।


प्रशासन की ओर से अतिक्रमण हटाने के लिए 3 से 4 दिन की मोहलत दी गई थी, जो अब समाप्त हो चुकी है। इस दौरान संबंधित लोगों से जमीन और दुकानों से जुड़े वैध कागजात मांगे गए थे। अधिकारियों के अनुसार, अधिकांश लोगों की ओर से संतोषजनक दस्तावेज पेश नहीं किए जा सके हैं, जिसके बाद कार्रवाई की तैयारी तेज कर दी गई है।


सार्वजनिक जमीन पर कब्जा उजागर


जांच में सामने आया है कि डोरंडा स्थित ईदगाह और उर्स मैदान सार्वजनिक व धार्मिक उपयोग के लिए चिन्हित जमीन है। इसके आसपास अस्थायी से लेकर पक्के निर्माण कर लिए गए हैं। इनमें खटाल, स्क्रैप यार्ड, कबाड़खाने और कई दुकानें शामिल हैं, जो बिना किसी वैध अनुमति के सरकारी जमीन पर संचालित हो रही हैं।


कागजात के दावे कमजोर


प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि बिजली बिल, पानी कनेक्शन या अन्य रसीदें जमीन के मालिकाना हक का प्रमाण नहीं मानी जा सकतीं। वैध दस्तावेज नहीं मिलने की स्थिति में अतिक्रमण हटाने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा है।
स्थानीय लोगों में नाराजगी


स्थानीय निवासियों का कहना है कि सड़क किनारे चल रहे खटाल और कबाड़खाने यातायात में बाधा बन रहे हैं। कबाड़ सड़क तक फैल जाने से दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ गया है। अवैध दुकानों के कारण पैदल चलने वालों को भी भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। लोगों का आरोप है कि लंबे समय तक प्रशासनिक ढिलाई के कारण अतिक्रमण बढ़ता गया।


कानूनी प्रक्रिया के तहत कार्रवाई


प्रशासन ने साफ किया है कि यह कार्रवाई पूरी तरह कानून के दायरे में की जाएगी। राजस्व रिकॉर्ड और नक्शों की जांच के बाद अतिक्रमण चिन्हित किया गया है। अभियान के दौरान पुलिस बल और दंडाधिकारी तैनात रहेंगे तथा पूरी कार्रवाई की वीडियोग्राफी भी कराई जाएगी। प्रशासन ने यह भी स्पष्ट किया है कि यह कदम किसी समुदाय विशेष के खिलाफ नहीं, बल्कि सार्वजनिक जमीन को मुक्त कराने के उद्देश्य से उठाया जा रहा है।


अब डोरंडा इलाके में सभी की निगाहें बुलडोजर की तारीख पर टिकी हैं। एक ओर प्रशासन सख्त है, तो दूसरी ओर खटाल संचालकों और दुकानदारों की बेचैनी बढ़ती जा रही है। आने वाले दिनों में डोरंडा प्रशासनिक कार्रवाई और संभावित विरोध का केंद्र बन सकता है।

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