विश्वविद्यालय अधिनियम में संशोधन कर पारंपरिक छात्र संघ चुनाव (Students Union Election) को समाप्त कर उसकी जगह छात्र परिषद (Student Council) लागू करने संबंधी बिल को राज्य विधानसभा से पारित कराए जाने के विरोध में आज राँची कॉलेज में आदिवासी छात्र संघ एवं आजसू पार्टी के संयुक्त नेतृत्व में जोरदार विरोध-प्रदर्शन किया गया।

इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए अपना आक्रोश व्यक्त किया और कहा कि यह निर्णय लोकतांत्रिक परंपराओं पर हमला है।
राँची कॉलेज अध्यक्ष विवेक तिर्की ने कहा कि “छात्र संघ चुनाव विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में लोकतांत्रिक परंपरा का प्रतीक रहा है। यह केवल चुनाव नहीं बल्कि विद्यार्थियों के राजनीतिक, सामाजिक और नेतृत्व कौशल को विकसित करने का माध्यम भी है। छात्र संघ चुनाव ने हमेशा समाज और राजनीति को नई दिशा देने वाले नेताओं को तैयार किया है। सरकार द्वारा इस परंपरा को खत्म कर ‘छात्र परिषद’ थोपना विद्यार्थियों की लोकतांत्रिक भागीदारी पर ताला लगाने जैसा है।”
नेताओं ने आरोप लगाया कि यह कदम सरकार की तानाशाही सोच को दर्शाता है और छात्रों की आवाज़ को दबाने का सीधा प्रयास है। उनका कहना था कि सरकार को डर है कि छात्र चुनाव के जरिए वास्तविक समस्याएँ मज़बूती से सामने आएँगी, इसलिए लोकतांत्रिक प्रक्रिया को समाप्त करने का प्रयास किया जा रहा है।
प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी कि यदि सरकार इस जनविरोधी संशोधन को वापस नहीं लेती है तो आने वाले दिनों में आंदोलन को और तेज़ किया जाएगा। राज्यभर के छात्र एकजुट होकर सड़कों पर उतरेंगे और सरकार को लोकतंत्र-विरोधी निर्णय वापस लेने के लिए बाध्य करेंगे।
छात्र संगठनों ने स्पष्ट किया कि विश्वविद्यालय और कॉलेजों में छात्र संघ चुनाव बहाल करना ही उनका मुख्य उद्देश्य है। उन्होंने कहा कि छात्र परिषद थोपने के बजाय सरकार को चाहिए कि वह चुनाव प्रक्रिया को और पारदर्शी बनाए तथा छात्रों को सही मंच उपलब्ध कराए।
आज के विरोध-प्रदर्शन एवं पुतला दहन कार्यक्रम में बड़ी संख्या में आदिवासी छात्र संघ और आजसू के पदाधिकारी, कार्यकर्ता एवं छात्र-छात्राएँ उपस्थित रहे। इनमें प्रमुख रूप से आदिवासी छात्र संघ के केंद्रीय अध्यक्ष सुशील उराँव, राँची कॉलेज अध्यक्ष विवेक तिर्की, दिनेश उराँव, लालेश्वर उराँव, आदित्य उराँव, समेत हज़ारों छात्र-छात्राएँ शामिल हुए।