सैंटविता हॉस्पिटल में पहली बार डबल चेंबर लीडलेस पेसमेकर का सफल प्रत्यारोपण ।

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सैंटविता हॉस्पिटल, रांची ने चिकित्सा जगत में एक नई उपलब्धि हासिल की है। अस्पताल में बिहार–झारखंड क्षेत्र का पहला डबल चेंबर लीडलेस पेसमेकर सफलतापूर्वक प्रत्यारोपित किया गया। यह ऐतिहासिक उपलब्धि प्रसिद्ध कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. वरुण कुमार और उनकी विशेषज्ञ टीम ने हासिल की।


🔹 राज्य का पहला डबल चेंबर लीडलेस पेसमेकर प्रत्यारोपण

यह उन्नत प्रक्रिया सैंटविता हॉस्पिटल में सम्पन्न हुई, जो झारखंड के हृदय उपचार क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है।
मरीज को वर्ष 2020 में पारंपरिक पेसमेकर लगाया गया था, लेकिन पांच वर्ष बाद उसमें गंभीर संक्रमण (Infection) हो गया और सुपीरियर वेना कावा में सिकुड़न पाई गई। पारंपरिक पेसमेकर दोबारा लगाना संभव नहीं था, ऐसे में लीडलेस तकनीक ने नई उम्मीद जगाई।


🔹 उन्नत अमेरिकी तकनीक से बिना चीरा लगाए प्रत्यारोपण

डॉ. वरुण कुमार ने संक्रमित पेसमेकर को लीड सहित सुरक्षित रूप से निकालकर नवीनतम अमेरिकी तकनीक वाला लीडलेस डबल चेंबर पेसमेकर लगाया।
यह अत्याधुनिक उपकरण अक्टूबर 2025 में भारत में लॉन्च किया गया था। इसे पैर की मुख्य नस के माध्यम से सीधे हृदय में प्रत्यारोपित किया जाता है — इसमें किसी प्रकार का चीरा नहीं लगाया जाता और न ही कोई बाहरी निशान रह जाता है।



🔹 कम जोखिम, बेहतर रिकवरी

इस तकनीक की सबसे बड़ी विशेषता है कि इसमें जटिलताओं का जोखिम बहुत कम होता है। प्रत्यारोपण के बाद मरीज पूरी तरह स्वस्थ है और डिस्चार्ज कर दिया गया है।
डॉ. वरुण कुमार के अनुसार, “यह तकनीक उन मरीजों के लिए वरदान है जिन्हें पारंपरिक पेसमेकर के बाद संक्रमण या लीड संबंधी जटिलताएँ होती हैं।”


🔹 सैंटविता हॉस्पिटल की उपलब्धि

सैंटविता हॉस्पिटल ने हमेशा आधुनिक तकनीकों को अपनाकर झारखंड और आसपास के राज्यों में उन्नत चिकित्सा सुविधाएं प्रदान की हैं।
यह प्रत्यारोपण झारखंड में हृदय रोग उपचार के क्षेत्र में एक नई शुरुआत है और भविष्य में कई मरीजों के जीवन को नई दिशा देगा।


📌 मुख्य बिंदु (Highlights):

राज्य का पहला डबल चेंबर लीडलेस पेसमेकर सफल प्रत्यारोपण

प्रक्रिया प्रसिद्ध कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. वरुण कुमार और उनकी टीम द्वारा सम्पन्न

पुराना पेसमेकर हटाकर सुरक्षित रूप से नया उपकरण प्रत्यारोपित

अक्टूबर 2025 में भारत में लॉन्च हुई अमेरिकी तकनीक का उपयोग

बिना चीरा और बिना बाहरी निशान के प्रत्यारोपण

रोगी पूर्णतः स्वस्थ और डिस्चार्ज



सैंटविता हॉस्पिटल का यह कदम न केवल झारखंड बल्कि पूरे पूर्वी भारत के लिए चिकित्सा क्षेत्र में एक नई दिशा और उम्मीद लेकर आया है। यह उपलब्धि भविष्य में हृदय रोगियों के लिए अत्याधुनिक और सुरक्षित उपचार का मार्ग प्रशस्त करेगी।

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