
रांची, 16 अगस्त 2026: केंद्र सरकार द्वारा पारित खान एवं खनिज (विकास एवं विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026 के विरोध में रविवार को रांची स्थित प्रदेश राजद कार्यालय में महागठबंधन की संयुक्त प्रेस वार्ता आयोजित की गई। महागठबंधन नेताओं ने विधेयक को राज्यों के संवैधानिक और वित्तीय अधिकारों पर हमला बताते हुए इसके खिलाफ लोकतांत्रिक एवं संवैधानिक तरीके से आंदोलन जारी रखने की बात कही।
प्रेस वार्ता में नेताओं ने कहा कि यह मुद्दा केवल झारखंड के अधिकारों तक सीमित नहीं है, बल्कि देश के संघीय ढांचे और राज्यों के अधिकारों की रक्षा से जुड़ा हुआ है।
महागठबंधन नेताओं के मुताबिक, वर्ष 2024 में सुप्रीम कोर्ट की नौ सदस्यीय संविधान पीठ ने अपने ऐतिहासिक फैसले में राज्यों की खनिज अधिकारों तथा खनिज वाली भूमि पर कर एवं उपकर लगाने की संवैधानिक शक्ति को स्पष्ट किया था। नेताओं ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार नए संशोधन के माध्यम से राज्यों की इसी शक्ति को सीमित करने का प्रयास कर रही है।
राजद उपाध्यक्ष अनीता यादव ने कहा कि झारखंड की खनिज संपदा राज्य की जनता की संपदा है। उन्होंने केंद्र से सहकारी संघवाद की भावना के अनुरूप राज्यों के संवैधानिक अधिकारों का सम्मान करने की मांग की।
वहीं, सीपीआई नेता अजय कुमार ने कहा कि इस मुद्दे पर विपक्षी दल एकजुट हैं। उन्होंने बताया कि 22 अगस्त को इंडिया गठबंधन की बैठक होगी, जिसमें विधेयक के खिलाफ आगे की रणनीति तय की जाएगी।
युवा राजद प्रदेश अध्यक्ष रंजन कुमार यादव ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट की नौ सदस्यीय संविधान पीठ के फैसले के बाद राज्यों के खनिज संबंधी अधिकार स्पष्ट हैं और इन्हें कानून के माध्यम से सीमित करने का प्रयास स्वीकार नहीं किया जाएगा।

भाकपा माले नेता शुभेंदु सेन ने इसे पूरे देश के संघीय ढांचे की रक्षा का सवाल बताया। वहीं, भाकपा माले नेता अनंत प्रसाद गुप्ता ने कहा कि झारखंड के खनिज संसाधनों से प्राप्त राजस्व का इस्तेमाल गरीबों, किसानों, मजदूरों, महिलाओं और युवाओं के कल्याण में होना चाहिए।
महागठबंधन नेताओं ने कहा कि राज्य के राजस्व स्रोतों को कमजोर करने से सामाजिक सुरक्षा और जनकल्याणकारी योजनाओं पर असर पड़ सकता है। नेताओं ने केंद्र सरकार से संशोधन विधेयक को वापस लेने की मांग की।
प्रेस वार्ता के दौरान महागठबंधन ने निर्णय लिया कि महामहिम राष्ट्रपति के नाम राज्यपाल के माध्यम से ज्ञापन सौंपकर खान एवं खनिज संशोधन विधेयक, 2026 को रद्द करने की मांग की जाएगी।
महागठबंधन नेताओं ने दोहराया कि झारखंड की खनिज संपदा पर राज्य के संवैधानिक और वित्तीय अधिकारों से कोई समझौता नहीं किया जाएगा।