
रांची: झारखंड में बेरोजगारी का फायदा उठाकर कुछ फर्जी प्लेसमेंट एजेंसियां और बिचौलिए नौकरी का झांसा देकर युवतियों को मानव तस्करी के जाल में फंसाने की कोशिश कर रहे हैं। राजधानी रांची समेत कई जिलों में बिजली के खंभों, दीवारों और चौक-चौराहों पर लगे “जॉब चाहिए? तुरंत कॉल करें” जैसे पोस्टर युवाओं को आकर्षित करते हैं, लेकिन जांच एजेंसियों और पुलिस द्वारा सामने आए कई मामलों ने इन विज्ञापनों पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
जानकारी के अनुसार, पोस्टर पर दिए गए नंबर पर संपर्क करने के बाद युवतियों से आधार कार्ड, शैक्षणिक प्रमाणपत्र और अन्य दस्तावेज लिए जाते हैं। अच्छी सैलरी, रहने-खाने की सुविधा और सुरक्षित नौकरी का भरोसा देकर उन्हें दिल्ली, हरियाणा, पंजाब, गुजरात, महाराष्ट्र, बेंगलुरु समेत अन्य राज्यों में भेजा जाता है।
पुलिस द्वारा उजागर किए गए कई मामलों में आरोप है कि वहां पहुंचने के बाद कुछ पीड़िताओं से तय शर्तों से अलग काम कराया गया, वेतन नहीं दिया गया, उनकी आवाजाही पर रोक लगा दी गई और मानसिक एवं शारीरिक शोषण किया गया। कई पीड़िताओं को पुलिस, रेलवे सुरक्षा बल (RPF) और सामाजिक संगठनों की मदद से रेस्क्यू किया गया, जबकि कई मामलों की जांच अभी भी जारी है।
पिछले एक वर्ष में झारखंड के विभिन्न जिलों और रेलवे स्टेशनों से मानव तस्करी की आशंका में करीब 200 लड़कियों को बचाया गया। खूंटी, गुमला, सिमडेगा, पलामू, पश्चिमी सिंहभूम और रांची ऐसे जिले हैं, जहां नौकरी और शादी का झांसा देकर लड़कियों को बाहर ले जाने के कई मामले सामने आए हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि गरीबी और बेरोजगारी का सबसे अधिक असर ग्रामीण क्षेत्रों की बेटियों पर पड़ता है। ऐसे में किसी भी नौकरी का प्रस्ताव स्वीकार करने से पहले कंपनी और प्लेसमेंट एजेंसी का सत्यापन जरूर करें। परिवार को पूरी जानकारी दें और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत पुलिस या प्रशासन को दें।
(यह रिपोर्ट उपलब्ध जानकारी, पुलिस कार्रवाई और सामाजिक संगठनों द्वारा सामने आए मामलों पर आधारित है। सभी प्लेसमेंट एजेंसियां या नौकरी के विज्ञापन फर्जी नहीं होते। किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले आधिकारिक सत्यापन अवश्य करें।)
रूपांतर: झारखंड की आवाज़
