रांची में जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा कांक्लेव-2026: मातृभाषाओं के संरक्षण, उच्च शिक्षा और क्लस्टर सिस्टम पर उठा बड़ा मुद्दा

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रांची, 4 जुलाई: रांची विश्वविद्यालय के दीक्षांत मंडप में शनिवार को आयोजित जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा कांक्लेव-2026 का भव्य आयोजन संपन्न हुआ। पूर्व शिक्षा मंत्री बंधु तिर्की के नेतृत्व में आयोजित इस कांक्लेव में झारखंड की जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषाओं के संरक्षण, संवर्धन, उच्च शिक्षा, शोध, रोजगार, डिजिटल विकास और नई शिक्षा नीति के प्रभावी क्रियान्वयन जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर व्यापक चर्चा हुई।


कार्यक्रम में करीब 4000 छात्र-छात्राओं, शोधार्थियों, भाषाविदों, साहित्यकारों, शिक्षकों और विभिन्न विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालयों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। आयोजन की शुरुआत पारंपरिक नगाड़ा वादन और सांस्कृतिक विधि-विधान के साथ हुई, जबकि समापन राष्ट्रगान के साथ किया गया।


इस अवसर पर रांची विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. (डॉ.) सरोज शर्मा, डीएसडब्ल्यू प्रो. (डॉ.) सुदेश साहू, कोलेबिरा विधायक नमन विक्सल कोंगाड़ी और पूर्व शिक्षा मंत्री बंधु तिर्की सहित नौ जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषाओं के विद्वान एवं भाषा प्रेमी मौजूद रहे।


वक्ताओं ने कहा कि मातृभाषाएं केवल संवाद का माध्यम नहीं, बल्कि समाज की संस्कृति, इतिहास और पहचान की आधारशिला हैं। उन्होंने सरकार से जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषाओं में शिक्षकों की शीघ्र नियुक्ति, विश्वविद्यालयों में विभागों को मजबूत करने, शोध एवं डिजिटल अध्ययन सामग्री विकसित करने तथा लोक साहित्य के दस्तावेजीकरण की दिशा में ठोस कदम उठाने की मांग की।


कांक्लेव में एक प्रमुख मांग यह भी उठी कि “क्लस्टर सिस्टम” के तहत स्नातक नामांकन सूची से बाहर किए गए जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा विषयों को दोबारा शामिल किया जाए, ताकि विद्यार्थियों को अपनी मातृभाषा में उच्च शिक्षा का अवसर मिल सके।

वक्ताओं ने नई शिक्षा नीति के अनुरूप मातृभाषा आधारित शिक्षा को प्रभावी ढंग से लागू करने तथा जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषाओं को रोजगार, शोध और तकनीकी विकास से जोड़ने पर भी जोर दिया।

कार्यक्रम के अंत में सभी प्रतिभागियों ने झारखंड की जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषाओं के संरक्षण, संवर्धन और भावी पीढ़ियों तक उनके प्रभावी हस्तांतरण के लिए सामूहिक रूप से कार्य करने का संकल्प लिया।

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