
रांची: रिनपास, कांके और टाटा सामाजिक विज्ञान संस्थान (TISS), मुंबई के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित चार दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम “क्वियर ट्रांस-अफर्मेटिव मानसिक स्वास्थ्य देखभाल” का तीसरा दिन शुक्रवार को सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।
कार्यक्रम की शुरुआत प्रतिभागियों द्वारा पिछले दिन के प्रशिक्षण की समीक्षा से हुई। इसके बाद विभिन्न विशेषज्ञों ने LGBTQ+ समुदाय के मानसिक स्वास्थ्य, अधिकार, अनुसंधान और सहायक हस्तक्षेप जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर अपने विचार साझा किए।
चेन्नई के डॉ. एल. रामकृष्णन ने भारत में LGBTQ+ समुदाय के स्वास्थ्य और मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े मुद्दों पर चर्चा करते हुए कहा कि सभी के लिए सम्मानजनक, समान और भेदभाव रहित स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना जरूरी है।
दूसरे सत्र में जागृति वांद्रेकर ने मानसिक स्वास्थ्य असमानताओं पर प्रकाश डालते हुए बताया कि सामाजिक भेदभाव, हिंसा और बहिष्कार के कारण LGBTQ+ समुदाय को अधिक मानसिक चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। उन्होंने समावेशी मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं की आवश्यकता पर जोर दिया।
दोपहर के सत्र में आशा अच्युतन ने LGBTQ+ समुदाय से जुड़े अनुसंधान में गोपनीयता, सूचित सहमति और नैतिक सिद्धांतों के महत्व पर विस्तार से जानकारी दी।
अंतिम सत्र में विनय चंद्रन ने बताया कि समान अनुभव रखने वाले लोगों का सहयोग यानी पीयर सपोर्ट मानसिक स्वास्थ्य सुधार, आत्मविश्वास बढ़ाने और पुनर्वास प्रक्रिया को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों ने विशेषज्ञों के साथ संवाद किया और केस आधारित चर्चाओं के माध्यम से विषय की गहरी समझ विकसित की।
कार्यक्रम का चौथा और अंतिम दिन 1 अगस्त 2026 को आयोजित होगा। इसमें क्वियर-अफर्मेटिव CBT, नैरेटिव थेरेपी, जेंडर नॉन-कन्फॉर्मिंग बच्चों के साथ कार्य करने की रणनीतियों और पोस्ट असेसमेंट पर विशेष सत्र होंगे।
