
नई दिल्ली: बच्चों और किशोरों में सोशल मीडिया की बढ़ती लत को लेकर के खिलाफ चल रहे मुकदमे में बड़ा अपडेट सामने आया है। फेसबुक और इंस्टाग्राम की पैरेंट कंपनी मेटा ने अमेरिकी राज्यों के साथ समझौते पर सहमति जताई है। इस मामले में कंपनी को अरबों डॉलर का भुगतान करना होगा और किशोर यूजर्स की सुरक्षा के लिए अपने प्लेटफॉर्म में कई बड़े बदलाव करने होंगे।

मेटा पर आरोप था कि उसने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को इस तरह डिजाइन किया कि बच्चे और युवा यूजर्स ज्यादा से ज्यादा समय तक फेसबुक और इंस्टाग्राम पर जुड़े रहें। कंपनी पर यह भी आरोप लगाया गया था कि बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा को लेकर पर्याप्त कदम नहीं उठाए गए और 13 साल से कम उम्र के बच्चों का डेटा कथित तौर पर गैरकानूनी तरीके से इकट्ठा किया गया।
इस मामले में करीब 29 अमेरिकी राज्य शामिल हैं। हालांकि, टेक्सास ने इस मामले में अलग समझौता किया है। कोर्ट की मंजूरी के बाद मेटा को कुछ महत्वपूर्ण शर्तों का पालन करना होगा।

किशोरों के लिए सोशल मीडिया इस्तेमाल पर नई पाबंदियां
समझौते का सबसे अहम हिस्सा 18 साल से कम उम्र के किशोरों के फेसबुक और इंस्टाग्राम इस्तेमाल से जुड़ा है। प्रस्तावित नियमों के तहत किशोरों को स्थानीय समय के अनुसार रात 12 बजे से सुबह 6 बजे तक फेसबुक और इंस्टाग्राम इस्तेमाल करने से अपने आप रोका जाएगा।
इसके अलावा फेसबुक और इंस्टाग्राम पर मिलाकर किशोरों के लिए दिन में दो घंटे की डिफॉल्ट इस्तेमाल सीमा तय की जाएगी। हालांकि, मैसेजिंग और लंबे वीडियो देखने का समय इस दो घंटे की सीमा में शामिल नहीं होगा।
रात के समय और स्कूल के समय किशोरों को मिलने वाले नोटिफिकेशन में भी बदलाव किए जाएंगे, ताकि पढ़ाई और नींद के दौरान सोशल मीडिया से होने वाली परेशानी को कम किया जा सके।
10 साल तक होगी स्वतंत्र निगरानी
समझौते के तहत मेटा की चाइल्ड सेफ्टी व्यवस्था की 10 साल तक स्वतंत्र निगरानी किए जाने की बात सामने आई है। इसका उद्देश्य यह देखना होगा कि कंपनी बच्चों और किशोरों की सुरक्षा से जुड़े तय नियमों का पालन कर रही है या नहीं।
हालांकि, इस समझौते का मतलब यह नहीं है कि मेटा ने अपने ऊपर लगे सभी आरोपों को स्वीकार कर लिया है। कंपनी ने किसी गलती या गैरकानूनी काम को स्वीकार किए बिना समझौते पर सहमति जताई है।

भारत के किशोरों पर अभी लागू नहीं होंगे नियम
फिलहाल ये बदलाव अमेरिका में किशोर यूजर्स पर लागू होंगे। भारत समेत दूसरे देशों में मेटा इन नियमों को लागू करती है या नहीं, यह अभी स्पष्ट नहीं है। इसलिए फिलहाल भारतीय किशोरों के लिए दो घंटे की लिमिट या रात 12 बजे से सुबह 6 बजे तक की पाबंदी लागू होने की बात नहीं कही जा सकती।
मेटा के खिलाफ यह मामला कैलिफोर्निया के ओकलैंड स्थित कोर्ट में चल रहा था। समझौते के बाद इस मुकदमे को खत्म करने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है। कंपनी को इस मामले में करीब 14 अरब डॉलर के भुगतान की बात भी सामने आई है, हालांकि अलग-अलग रिपोर्टों में समझौते की रकम को लेकर आंकड़ों में अंतर देखने को मिल रहा है।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या अमेरिका में लागू होने वाले ये सख्त नियम भविष्य में भारत और दूसरे देशों के किशोर यूजर्स के लिए भी लागू किए जाएंगे?
