
रांची: झारखंड में खनिजों पर सेस लगाने के अधिकार को लेकर केंद्र और राज्य सरकार के बीच विवाद बढ़ता जा रहा है। केंद्र सरकार की ओर से लाए गए एमएमडीआर संशोधन विधेयक के प्रावधानों को लेकर झारखंड सरकार ने विरोध जताया है। इसी मुद्दे पर चर्चा और प्रस्ताव पारित करने के लिए राज्य सरकार 5 और 6 अक्टूबर को विधानसभा का विशेष सत्र बुलाने की तैयारी में है।
जानकारी के मुताबिक, विशेष सत्र में खनिजों पर सेस लगाने के राज्य के अधिकार को खत्म या सीमित किए जाने के विरोध में प्रस्ताव लाया जाएगा। सरकार का कहना है कि खनिजों से जुड़े राजस्व पर राज्य का अधिकार महत्वपूर्ण है और इसे समाप्त नहीं किया जाना चाहिए।
वित्त मंत्री ने बताया राज्य का अधिकार
झारखंड के वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने कहा है कि सेस वसूलना राज्य का अधिकार है। उनके मुताबिक, सुप्रीम कोर्ट के फैसले से भी राज्यों के इस अधिकार को मान्यता मिली है। ऐसे में केंद्र सरकार द्वारा इस अधिकार पर रोक लगाए जाने को लेकर राज्य सरकार आपत्ति जता रही है।
सरकार की ओर से इस मामले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने की तैयारी भी की जा रही है। बताया गया है कि विधि विभाग से राय लेने के बाद आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

खनिज राजस्व पर नजर
झारखंड के लिए खनिज से होने वाली आय बेहद महत्वपूर्ण है। सरकार के अनुमान के अनुसार, चालू वित्त वर्ष में खनिज सेस से करीब 14 हजार करोड़ रुपये की अतिरिक्त आय का अनुमान लगाया गया है। वहीं, 31 अगस्त तक खनिज सेस की वसूली का आंकड़ा करीब 4700 करोड़ रुपये से अधिक बताया गया है।
राज्य सरकार का कहना है कि खनिज बहुल झारखंड में खनिज संसाधनों से मिलने वाला राजस्व राज्य के विकास और विभिन्न योजनाओं के लिए महत्वपूर्ण है।
अब 5 और 6 अक्टूबर को होने वाले विधानसभा के विशेष सत्र में इस मुद्दे पर सरकार क्या प्रस्ताव लाती है और केंद्र के नए प्रावधानों के खिलाफ आगे की क्या रणनीति तय करती है, इस पर सभी की नजर रहेगी।
