
रांची: राजधानी रांची के कांके रोड स्थित ब्रह्मचारी नगर कॉलोनी में पारंपरिक दुर्गा पूजा का आयोजन श्रद्धा, भक्ति और आपसी सहयोग के साथ किया जाता है। यहां स्थित अष्टभुजी दुर्गा मंदिर में होने वाली पूजा की खासियत यह है कि मोहल्ले के लोग मिल-जुलकर सभी धार्मिक अनुष्ठानों में भाग लेते हैं और वर्षों से चली आ रही परंपरा को आगे बढ़ाते हैं।
ब्रह्मचारी नगर की दुर्गा पूजा में सामूहिक सहभागिता और सेवा भावना की अनूठी मिसाल देखने को मिलती है। प्रतिदिन सुबह मोहल्ले के लोग मंदिर और पूजा पंडाल की साफ-सफाई करते हैं। इसके बाद पूजा की तैयारियों में सभी अपनी-अपनी जिम्मेदारी निभाते हैं। कोई फूल-माला लाता है, तो कोई आम के पत्ते, पान के पत्ते और दूब घास की व्यवस्था करता है। वहीं, कुछ लोग फल और प्रसाद लेकर आते हैं। सभी मिलकर विधि-विधान से मां दुर्गा की पूजा-अर्चना करते हैं।

दुर्गा सप्तशती पाठ और संध्या आरती में जुटते हैं मोहल्लेवासी
पूजा के दौरान दिन में विद्वान पंडित द्वारा दुर्गा सप्तशती का पाठ किया जाता है। वहीं, प्रत्येक संध्या सात बजे मोहल्ले के लोग एकत्रित होकर मां दुर्गा की आरती करते हैं। इस दौरान पूरा वातावरण भक्तिमय हो जाता है और श्रद्धालु मां दुर्गा से सुख, शांति एवं समृद्धि की कामना करते हैं।
डॉ. प्रभाकर मिंटू चौबे निभाते हैं अहम भूमिका
इस सामूहिक आयोजन को व्यवस्थित रूप से संचालित करने और मोहल्ले के लोगों को एकजुट रखने में अष्टभुजी दुर्गा मंदिर एवं पूजा समिति के संस्थापक और अध्यक्ष डॉ. प्रभाकर मिंटू चौबे अहम भूमिका निभाते हैं। उनके नेतृत्व में मोहल्लेवासी मिलकर पूजा की तैयारियों से लेकर धार्मिक अनुष्ठानों तक में सहयोग करते हैं।
ब्रह्मचारी नगर की यह पारंपरिक वैष्णव दुर्गा पूजा धार्मिक आस्था के साथ-साथ सामाजिक एकता, सामूहिक सहयोग और सांस्कृतिक परंपराओं को सहेजने का संदेश भी देती है। यहां दुर्गा पूजा केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि पूरे मोहल्ले को एक सूत्र में बांधने वाला उत्सव है।