आदिवासी एकता महारैली नहीं बल्कि, कांग्रेस पार्टी की महारैली थी -आदिवासी महासभा

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माँडर के पूर्व प्रमुख सह आदिवासी महासभा के महासचिव श्री बुधवा उरांव के द्वारा प्रेस विज्ञप्ति जारी कर कहा गया कि 4 फरवरी 2024 को अयोजित आदिवासी एकता महारैली नहीं बल्कि यह कांग्रेस पार्टी की महारैली थी कांग्रेस पार्टी की यह रैली धर्मांतरित बंधु तिर्की की अगवाई में आयोजित की गई थी इस धर्मांतरित ईसाइयों की रैली में सरना समाज के धार्मिक प्रतीक चिन्ह के साथ खिलवाड़ किया गया और आदिवासियों के धार्मिक भावनाओं के साथ खिलवाड़ किया गया आदिवासियों के धार्मिक प्रतीक चिन्ह पर जिस पर सरना समाज के पहान राजा एवं पडहा राजा विराजमान होते हैं उस पर कांग्रेस के नेता बंधु तिर्की को बैठा कर सरना समाज के धार्मिक पारंपरिक संस्कृति को तोड़ा गया और अपमानित किया गया आदिवासियों के धार्मिक परंपरा को तोड़ने वाले इन तथाकथित नेताओं से पूरा सरना समाज पूछना चाहती है कि किस पहान राजाओं और किस पडहा राजाओं के आदेश पर आदिवासियों के धार्मिक सांस्कृतिक परंपराओं का दुरुपयोग एवं अपमानित करने का काम किया गया | तथाकथित नेताओं को आदिवासियों के धार्मिक प्रतीक चिन्ह घोड़े पर बैठने की इजाजत किसने दिया |

आदिवासियों के धार्मिक भावनाओं के साथ खिलवाड़ करने वाले इन तथा कथित नेताओं पर कार्रवाई करने के लिए प्रत्येक गांव के पहान एवं प्रत्येक पडहा राजाओं का महा जूटान किया जाएगा और सामाजिक करवाई किया जाएगा कुछ नेताओं द्वारा अपने निजी स्वार्थ के लिए आदिवासियों के धार्मिक प्रतीक चिन्ह का दुरुपयोग किया जा रहा है और आदिवासी समाज का अपमान किया जा रहा है यह बहुत गंभीर बात है | 4 फरवरी की रैली में आदिवासियों के धार्मिक प्रतिक चिन्ह का अपमान किया गया जिसको लेकर विभिन्न गांव मौजा के पहान राजा एवं पडहा राजाओं की बैठक बुलाई जाएगी | धार्मिक प्रतिक चिन्ह का उपयोग किसी भी राजनीतिक नेता एवं सरना धर्म छोड़कर ,हिंदू धर्म ईसाई धर्म में गए लोगों द्वारा बिना पहान एवं पडहा राजाओं के अनुमति के बगैर दुरुपयोग करने नहीं दिया जाएगा सरना झंडा और पवित्र कडसा एवं पारंपरिक धार्मिक प्रतीक चिन्ह का उपयोग बिना आदिवासी समाज के अगुवाओ के इजाजत के बिना करना पूरे आदिवासी समाज का अपमान है और पूरा आदिवासी समाज ऐसे लोगों का सामाजिक बहिष्कार करने का कार्य करेगी।

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