
रांची: झारखंड मुक्ति मोर्चा के महासचिव विनोद कुमार पांडेय ने भाजपा प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू के बयान पर पलटवार करते हुए कहा है कि भाजपा को झारखंड के संवैधानिक अधिकारों, खनिज संपदा और राज्य के राजस्व से जुड़े सवालों का स्पष्ट जवाब देना चाहिए।
विनोद कुमार पांडेय ने कहा कि जब मामला झारखंड के खनिज अधिकार और राज्य के राजस्व से जुड़ा हो, तब मुद्दे का जवाब देने के बजाय भ्रम फैलाना उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि झारखंड से निर्वाचित भाजपा सांसदों को भी केंद्र सरकार के प्रस्तावित कदम पर अपनी स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।

JMBL Cess को लेकर उठाया सवाल
झामुमो महासचिव ने कहा कि JMBL Cess कोई मनमाना टैक्स नहीं है। जुलाई 2024 में सर्वोच्च न्यायालय की नौ सदस्यीय संविधान पीठ ने खनिजयुक्त भूमि को भूमि मानते हुए राज्यों के कराधान अधिकार को मान्यता दी थी। इसी संवैधानिक अधिकार के आधार पर झारखंड विधानसभा ने कानून बनाया।
उन्होंने सवाल उठाया कि जब सर्वोच्च न्यायालय राज्यों के अधिकार को मान्यता दे चुका है, तो केंद्र सरकार को राज्यों द्वारा खनिजयुक्त भूमि पर लगाए जाने वाले कर, सेस और लेवी के संबंध में शर्तें तय करने की आवश्यकता क्यों पड़ रही है?

हजारों करोड़ के राजस्व का दावा
विनोद कुमार पांडेय ने कहा कि JMBL Cess से झारखंड को महत्वपूर्ण राजस्व मिलने का अनुमान है। उनके अनुसार वर्ष 2024-25 में करीब ₹1,379 करोड़, वर्ष 2025-26 में करीब ₹7,488 करोड़ और वर्ष 2026-27 में करीब ₹13,215 करोड़ के राजस्व का अनुमान है।
उन्होंने भाजपा से पूछा कि यदि इस राजस्व स्रोत को सीमित किया जाता है तो इसकी भरपाई कौन करेगा। उन्होंने कहा कि रॉयल्टी, नीलामी प्रीमियम, DMF और GST को JMBL Cess का विकल्प बताकर मूल सवाल से बचा नहीं जा सकता।
खनन प्रभावित क्षेत्रों का भी मुद्दा उठाया
झामुमो नेता ने कहा कि खनन के कारण विस्थापन, पर्यावरणीय दबाव, पानी और हवा पर असर तथा स्थानीय बुनियादी ढांचे पर अतिरिक्त बोझ पड़ता है। आदिवासी और स्थानीय समुदायों को भी इसकी सामाजिक-सांस्कृतिक कीमत चुकानी पड़ती है।
उन्होंने कहा कि खनन प्रभावित लोगों के पुनर्वास, स्वास्थ्य, शिक्षा, पेयजल और ग्रामीण विकास के लिए राज्य को अतिरिक्त संसाधन जुटाने का अधिकार होना चाहिए।
‘खनिज लूट’ के आरोप पर पलटवार
भाजपा द्वारा JMBL Cess को लेकर लगाए जा रहे ‘लूट’ के आरोपों पर विनोद कुमार पांडेय ने कहा कि यदि किसी मामले में अनियमितता के प्रमाण हैं तो भाजपा उन्हें जांच एजेंसियों और कानून के सामने रखे। केवल प्रेस बयान जारी कर आरोप लगाना प्रमाण नहीं है।

उन्होंने कहा कि छात्रों के मुद्दों को JMBL Cess से जोड़ना भी मुद्दे को भटकाने की कोशिश है। छात्रों की समस्याएं महत्वपूर्ण हैं, लेकिन उनके नाम पर झारखंड के खनिज अधिकारों से जुड़े सवाल को दबाया नहीं जा सकता।
‘झारखंड अपने अधिकारों से समझौता नहीं करेगा’
विनोद कुमार पांडेय ने कहा कि केंद्र और राज्य के बीच अधिकारों को लेकर सवाल उठाना टकराव नहीं बल्कि संवैधानिक संघवाद की रक्षा है। उन्होंने कहा कि झामुमो की राजनीति जल-जंगल-जमीन और झारखंड के अधिकारों से जुड़ी रही है और पार्टी राज्य के अधिकारों के लिए मजबूती से आवाज उठाती रहेगी।
उन्होंने भाजपा से सीधा सवाल करते हुए कहा कि झारखंड की खनिज संपदा पर अंतिम नियंत्रण किसका होना चाहिए—झारखंड की जनता का या दिल्ली का?
विनोद कुमार पांडेय ने कहा कि झारखंड को उपदेश नहीं, बल्कि अपने संवैधानिक अधिकारों की गारंटी चाहिए। राज्य की खनिज संपदा से मिलने वाले राजस्व का न्यायपूर्ण लाभ झारखंड के लोगों को मिलना चाहिए।
