
नई दिल्ली/रांची: झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने नई दिल्ली में आयोजित दो दिवसीय नेशनल स्टेकहोल्डर्स कंसल्टेशन 2026 का विधिवत शुभारंभ किया। सूचना प्रौद्योगिकी, उद्योग एवं पर्यटन विभाग के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस कार्यक्रम में देश-विदेश के उद्योग जगत, आईटी कंपनियों, नीति निर्माताओं, शिक्षाविदों और तकनीकी विशेषज्ञों ने भाग लिया।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा कि “झारखंड की पहचान केवल माइंस से नहीं, बल्कि माइंड्स से भी होनी चाहिए।” उन्होंने कहा कि राज्य को प्राकृतिक संसाधनों के साथ-साथ अनुसंधान, नवाचार और ज्ञान आधारित अर्थव्यवस्था की दिशा में आगे बढ़ाना सरकार की प्राथमिकता है। उनका कहना था कि झारखंड अब केवल खनन तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि रिसर्च, इनोवेशन और आधुनिक तकनीक के क्षेत्र में भी नई पहचान बनाएगा।

पहले दिन आईटी, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), डिजिटल गवर्नेंस और भविष्य की तकनीकों पर व्यापक मंथन हुआ। इस दौरान माइक्रोसॉफ्ट, गूगल, आईबीएम समेत कई प्रमुख तकनीकी कंपनियों और उद्योग संगठनों के प्रतिनिधियों ने झारखंड में डिजिटल इकोसिस्टम को मजबूत करने, आईटी निवेश बढ़ाने और भविष्य की तकनीकों के अनुरूप राज्य को विकसित करने के सुझाव दिए।

कार्यक्रम में झारखंड एआई पॉलिसी, इन्वेस्टमेंट प्रमोशन पॉलिसी, टूरिज्म पॉलिसी, टेक्सटाइल पॉलिसी, जियाडा रेगुलेशंस और पीपीपी पॉलिसी के कॉन्सेप्ट पेपर भी हितधारकों के सामने प्रस्तुत किए गए। सरकार ने इन नीतियों पर उद्योग जगत और विशेषज्ञों से सुझाव आमंत्रित किए, ताकि इन्हें और अधिक प्रभावी तथा निवेशक-अनुकूल बनाया जा सके।

इस अवसर पर सरकार और उद्योग जगत के बीच बिजनेस-टू-गवर्नमेंट (B2G) संवाद भी आयोजित हुआ, जिसमें झारखंड में निवेश, रोजगार सृजन, डिजिटल गवर्नेंस और आधुनिक तकनीकों के क्षेत्र में साझेदारी की संभावनाओं पर विस्तार से चर्चा की गई।

मुख्यमंत्री ने कहा कि हितधारकों के सुझावों के आधार पर सरकार ऐसी नीतियां तैयार करेगी जो निवेश आकर्षित करने के साथ-साथ युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा करें और झारखंड के समावेशी एवं सतत विकास को नई गति दें।

कार्यक्रम में ग्रामीण विकास मंत्री दीपिका पाण्डेय सिंह, स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी, उद्योग मंत्री संजय कुमार यादव, पर्यटन मंत्री सुदिव्य कुमार, मुख्य सचिव अविनाश कुमार, विकास आयुक्त अजय कुमार सिंह सहित कई वरिष्ठ अधिकारी और विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञ उपस्थित रहे।


