
रांची के धुर्वा स्थित पुराने विधानसभा सभागार में 24 जून 2026 को बृहद झारखंड कुड़मी समन्वय समिति की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता समिति के मुख्य संयोजक शीतल ओहदार ने की। बैठक में कुड़मी समाज से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई।
बैठक को संबोधित करते हुए शीतल ओहदार ने कहा कि कुड़मी समाज पिछले 75 वर्षों से कुड़मी जनजाति को अनुसूचित जनजाति की सूची में शामिल करने और कुड़माली भाषा को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल करने की मांग कर रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार चुनाव के समय आश्वासन देती है लेकिन बाद में अपने वादे से पीछे हट जाती है।

उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के दौरान गृह मंत्री अमित शाह ने कुड़माली भाषा को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल करने का वादा किया था। अब केंद्र सरकार को अपना वादा निभाना चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि दो माह के भीतर कैबिनेट में प्रस्ताव नहीं लाया गया तो झारखंड, बंगाल और ओडिशा में आर्थिक नाकेबंदी की जाएगी।

बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि लोकसभा के आगामी मानसून सत्र के दौरान दिल्ली के जंतर-मंतर में बृहद झारखंड कुड़मी समन्वय समिति के बैनर तले धरना-प्रदर्शन किया जाएगा। इसमें पारंपरिक कुड़मी संस्कृति, वाद्य यंत्र और पोशाक के साथ बड़ी संख्या में लोग शामिल होंगे।
जातीय जनगणना को लेकर भी समाज ने लोगों से सतर्क रहने की अपील की। बैठक में कहा गया कि जाति में “कुड़मी” और भाषा में “कुड़माली” दर्ज कराने में किसी प्रकार की गलती नहीं होनी चाहिए। इसके लिए प्रत्येक प्रखंड में जागरूकता सेमिनार आयोजित किए जाएंगे।

बैठक में संगठन विस्तार करते हुए रामपोदो महतो को केंद्रीय प्रधान कार्यकारी अध्यक्ष और नरेश कुड़मी महतो को रांची जिला सचिव नियुक्त किया गया। कार्यक्रम में समाज के कई वरिष्ठ नेता और सैकड़ों लोग उपस्थित रहे।