झारखंड हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: आदिवासी जमीन हस्तांतरण को अनंत काल तक नहीं दी जा सकती चुनौती

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रांची: झारखंड हाईकोर्ट ने छोटानागपुर काश्तकारी अधिनियम (सीएनटी एक्ट) के तहत आदिवासी जमीन के हस्तांतरण (रिस्टोरेशन) से जुड़े मामलों में महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि आदिवासी जमीन के हस्तांतरण को अनिश्चितकाल तक चुनौती नहीं दी जा सकती।


हाईकोर्ट की एकल पीठ ने कहा कि यदि किसी मामले का पहले ही निपटारा हो चुका है और निर्धारित समय के भीतर उस आदेश को चुनौती नहीं दी गई, तो कई वर्षों बाद उसी विवाद को दोबारा नहीं खोला जा सकता। अदालत ने माना कि कानूनी प्रक्रिया समय-सीमा के भीतर पूरी होनी चाहिए और पुराने मामलों को बिना ठोस आधार के दोबारा उठाना न्यायसंगत नहीं है।

यह मामला छोटानागपुर क्षेत्र की एक जमीन से जुड़ा था, जिसका विवाद आजादी के समय से चला आ रहा था। मामले में पहले भी फैसला हो चुका था, लेकिन वर्षों बाद दोबारा रिस्टोरेशन की प्रक्रिया शुरू की गई। हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के पूर्व फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि अत्यधिक देरी के बाद ऐसे मामलों को फिर से खोलना उचित नहीं है।


इस फैसले से उन मामलों पर असर पड़ेगा, जहां दशकों पुराने जमीन विवादों को फिर से अदालतों में लाया जाता रहा है। साथ ही, प्रशासनिक अधिकारियों को भी पुराने मामलों में कार्रवाई से पहले समय-सीमा और कानूनी स्थिति का ध्यान रखने का निर्देशात्मक संदेश मिला है।

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