
नई दिल्ली: भारत टेक्स 2026 के वैश्विक मंच पर झारखंड पवेलियन ने अपनी समृद्ध हस्तशिल्प और वस्त्र विरासत से देश-विदेश के खरीदारों का ध्यान आकर्षित किया। पवेलियन में प्रदर्शित तसर सिल्क से बने परिधान, स्टोल, स्कार्फ और गृह सज्जा उत्पादों को विशेष सराहना मिली। इन उत्पादों ने झारखंड की पारंपरिक कला, उत्कृष्ट शिल्पकला और गुणवत्ता को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाई।

झारखंड देश के प्रमुख तसर उत्पादक राज्यों में शामिल है। राज्य के हजारों ग्रामीण और आदिवासी परिवार तसर उद्योग से जुड़े हुए हैं और इसी से अपनी आजीविका चलाते हैं। राज्य सरकार तसर सिल्क, जीआई टैग उत्पादों, बांस आधारित उद्यमों और जनजातीय कला को राष्ट्रीय एवं वैश्विक बाजारों से जोड़ने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। इन पहलों का उद्देश्य स्थानीय कारीगरों, बुनकरों और शिल्पकारों को बेहतर बाजार उपलब्ध कराना तथा उनकी आय और रोजगार के अवसरों में वृद्धि करना है।

भारत टेक्स 2026 में 120 से अधिक देशों के खरीदारों, निवेशकों और प्रतिनिधियों ने भाग लिया। इस दौरान हजारों प्रदर्शकों ने टेक्सटाइल, परिधान और हस्तशिल्प क्षेत्र से जुड़े अपने नवीनतम उत्पादों का प्रदर्शन किया। यह आयोजन झारखंड के एमएसएमई, स्वयं सहायता समूहों, बुनकरों और महिला उद्यमियों के लिए नए व्यापारिक संपर्क स्थापित करने और निर्यात की संभावनाओं को विस्तार देने का महत्वपूर्ण मंच साबित हुआ।

झारखंड पवेलियन ने राज्य की पारंपरिक शिल्प और वस्त्र विरासत को प्रभावी ढंग से वैश्विक खरीदारों के सामने प्रस्तुत किया। इससे स्थानीय कारीगरों और उद्यमियों के लिए नए व्यापारिक अवसरों की संभावनाएं और मजबूत हुई हैं। उम्मीद जताई जा रही है कि इस तरह के अंतरराष्ट्रीय आयोजनों से झारखंड के पारंपरिक उत्पादों को वैश्विक बाजार में नई पहचान मिलेगी और राज्य के हस्तशिल्प तथा वस्त्र उद्योग को दीर्घकालिक लाभ होगा।




