झारखंड आदिवासी महोत्सव 2026: विश्व आदिवासी दिवस पर सिनेमा के रंग में रंगा रांची, आदिवासी फिल्मों की स्क्रीनिंग और मास्टरक्लास ने जगाई नई उम्मीद

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रांची। विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर राजधानी रांची दो दिनों तक सिनेमा के रंग में रंगी रही। झारखंड फिल्म एवं टेलीविजन संस्थान की स्थापना की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में दो दिवसीय फिल्म फेस्टिवल, मास्टरक्लास, आदिवासी फिल्मों की विशेष स्क्रीनिंग और परिचर्चा का आयोजन किया गया। इस आयोजन में सिनेमा के माध्यम से झारखंड की संस्कृति, पहचान, परंपरा, भाषा और सामाजिक सरोकारों को समझने और उन पर संवाद करने का अवसर मिला।


दो दिनों तक चले इस आयोजन में आदिवासी जीवन, संस्कृति और समाज की विविधता को केंद्र में रखने वाली फिल्मों की विशेष स्क्रीनिंग की गई। फिल्मों के प्रदर्शन के बाद फिल्मकारों, विशेषज्ञों, विद्यार्थियों और दर्शकों के बीच संवाद एवं परिचर्चा भी हुई। इस दौरान फिल्मों के कथ्य, निर्माण प्रक्रिया और उनके सामाजिक-सांस्कृतिक प्रभावों पर विस्तार से चर्चा की गई।


सिनेमा के जरिए आदिवासी समाज को समझने की कोशिश
फिल्म फेस्टिवल का सबसे महत्वपूर्ण पक्ष आदिवासी समाज और उसकी विविध सांस्कृतिक पहचान को सिनेमा के माध्यम से समझने की कोशिश रही। फिल्मों में दिखाई गई कहानियों और अनुभवों ने दर्शकों को आदिवासी जीवन, परंपराओं, संघर्षों और सामाजिक सरोकारों से जुड़ने का अवसर दिया।
आयोजन के दौरान यह संदेश भी उभरकर सामने आया कि सिनेमा केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं है, बल्कि यह समाज की स्मृतियों, संघर्षों, सवालों और सांस्कृतिक पहचान को अभिव्यक्त करने का एक प्रभावी माध्यम है।


मास्टरक्लास में विद्यार्थियों को मिली फिल्म निर्माण की समझ
मास्टरक्लास कार्यक्रम विद्यार्थियों और सिनेप्रेमियों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र रहा। इसमें फिल्म निर्माण की बारीकियों, कहानी कहने की कला और सिनेमा के सामाजिक एवं सांस्कृतिक प्रभावों से प्रतिभागियों को परिचित कराया गया।


फिल्मकारों और विशेषज्ञों के साथ संवाद के दौरान प्रतिभागियों ने फिल्म निर्माण से जुड़े विभिन्न पहलुओं को समझा। विद्यार्थियों को सिनेमा को केवल पर्दे पर देखने के बजाय उसके पीछे की रचनात्मक प्रक्रिया और विचार को समझने का अवसर मिला।


रांची में तैयार हुआ सिनेमा के लिए साझा मंच
दो दिवसीय आयोजन ने फिल्म विद्यार्थियों, फिल्म निर्माताओं, कलाकारों, सिनेप्रेमियों और सिनेमा से जुड़े लोगों को एक साझा मंच उपलब्ध कराया। स्क्रीनिंग के दौरान दर्शकों का उत्साह और फिल्मों के बाद हुई परिचर्चाओं में उनकी सक्रिय भागीदारी पूरे कार्यक्रम को जीवंत बनाती रही।


झारखंड में लंबे समय से फिल्म निर्माण और सिनेमा के लिए एक मजबूत एवं रचनात्मक मंच की आवश्यकता महसूस की जाती रही है। ऐसे में यह आयोजन राज्य में फिल्म और टेलीविजन के क्षेत्र में नई संभावनाओं की दिशा में महत्वपूर्ण पहल के रूप में देखा जा रहा है।


झारखंड में सार्थक सिनेमा के लिए संभावनाओं का संकेत
कार्यक्रम में शामिल दर्शकों, विद्यार्थियों और सिनेमा से जुड़े लोगों ने इस तरह के आयोजनों को झारखंड में सिनेमा के विकास के लिए महत्वपूर्ण बताया। आयोजन ने यह भी दिखाया कि झारखंड में फिल्मों और फिल्म निर्माण को लेकर उत्साह के साथ-साथ ऐसा दर्शक वर्ग भी मौजूद है, जो सार्थक, विषयपरक और सामाजिक सरोकारों से जुड़ा सिनेमा देखने और उस पर संवाद करने के लिए तैयार है।

झारखंड फिल्म एवं टेलीविजन संस्थान की स्थापना की दिशा में आयोजित यह फिल्म फेस्टिवल राज्य में फिल्म शिक्षा, फिल्म निर्माण और स्थानीय कहानियों को मंच देने की संभावनाओं को मजबूत करने वाली पहल के रूप में सामने आया है।

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