झारखंड का प्राकृतिक पर्व करम पूजा बैंगलोर में धूम-धाम से मनाया गया-(अध्यक्ष)जगन्नाथ लोहरा

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कर्नाटक(बैंगलौर)बी.ई.एल.आफिसर क्लब बैंगलोर में झारखंड राज्य के आदिवासियों का प्रमुख प्राकृतिक त्योहार में से एक “करम पर्व महोत्सव-2025” सरना वेलफेयर सोसाइटी बैंगलौर(अध्यक्ष)-श्री जगन्नाथ लोहरा जी व (महासचिव)-रामचन्द्र भगत जी के संयुक्त नेतृत्व में धुम-धाम से मनाया गया।


बैंगलोर में रहनेवाले झारखंड रांची का बेटा बैंगलोर में नव पंजीकरण संस्था “सरना वेल्फेयर सोसाइटी बंगलौर(अध्यक्ष)-श्री जगन्नाथ लोहरा ने बताया कि करम पर्व हम झारखंड में बचपन से मनाते आ रहे हैं जिससे कर्नाटक राज्य के बैंगलोर में रहनेवाले आदिवासी पिछले एक दशक के लगातार संघर्षों का परिणाम है कि बैंगलोर में रहनेवाले सरना धर्म मानने वाले आदिवासियों के लिए “सरना वेलफेयर सोसाइटी बैंगलोर” के नाम से संस्था पंजीकरण 2024-25 हुआ और वर्ष 2025 में पहली बार करम पूजा महोत्सव सफलतापूर्वक मनाया गया।
कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के रुप में सत्यम कच्छप लोहरा ने कहा कि कर्नाटक राज्य के बैंगलौर सिटी में करम पूजा महोत्सव का शानदार आयोजन के लिए आभार व्यक्त करते हैं साथ ही बैंगलोर में करम पूजा महोत्सव आयोजन होने से बैंगलोर के आसपास शहरो व राज्यों में कार्यरत कर्मचारियों व मजदूरों को एक साथ मिलने का मौका मिलता है कर्नाटक राज्य के बैंगलौर में करम पर्व महोत्सव में शामिल होकर ऐसा लगा मानो हम झारखंड में ही है। इसी तरह झारखंड राज्य के बाहर रहने वाले समस्त कर्मचारियों व मजदूरों आदिवासी भाई-बहन एक साथ मिलकर रहेंगें यही कामना करते हैं। साथ ही पूर्वजों से मिला धरोहर, प्राकृतिक धर्म,कला-सांस्कृतिक, पहचान को बचाये रखने की जरुरत है।


बैंगलोर सरना वेलफेयर सोसाइटी(महासचिव)रामचन्द्र भगत ने बताया कि करम प्राकृतिक की अराधना का पर्व है हमारे पूर्वजों ने जब प्राकृतिक को भगवान का प्रतिरूप मानकर उसकी पूजा अर्चना आरंभ कि यह एक वैज्ञानिक चेतना थी हमारे पूर्वजों ने सात्विक भावना से वृक्षों को ईश्वर माना और नदियों को मां कह के पुकारा,आज हमारे पूर्वजों की भावनाओं को पूर्ण प्रतिष्ठा का संकल्प लेने की जरुरत है।
कार्यक्रम में मुख्य रूप से उपस्थित कार्यकारी अध्यक्ष-विवेकानन्द उरांव,संयुक्त सचिव-डबलू उरांव,सिसिर उरांव, संगठन सचिव-रामकिशोर कच्छप, कोषाध्यक्ष-दिलीप तिग्गा, श्रीमती बिमला तिर्की, लक्ष्मी कुमारी,अर्जुन लोहरा, प्रवीण भगत,विवेक उरांव, विश्राम भगत,सिताराम उरांव, संजीत उरांव,देवनाथा काका, बाबूलाल भगत, जयराम भगत, मनीषा उरांव,अनुज उरांव,गुईंजरा देवी,अनीता उरांव,विदेश लोहरा व अन्य उपस्थित हुए।
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