
दावोस/रांची | विश्व आर्थिक मंच World Economic Forum की वार्षिक बैठक में झारखंड ने अपने महिला-केंद्रित और स्थानीय मूल्यों पर आधारित विकास मॉडल को वैश्विक समुदाय के समक्ष प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया। Davos में आयोजित इस सत्र में झारखंड विधानसभा की सदस्य एवं महिला एवं बाल विकास समिति की अध्यक्ष कल्पना मुर्मू सोरेन ने राज्य के ‘महिला-केंद्रित विकास विज़न’ को साझा किया।
झारखंड सरकार द्वारा BRICS Chamber of Commerce and Industry (BRICS CCI) के महिला अधिकारिता वर्टिकल के सहयोग से झारखंड पवेलियन में आयोजित उच्च-स्तरीय पैनल चर्चा का विषय था — “महिला उद्यमिता: विकास को गति देना और एक सतत अर्थव्यवस्था का निर्माण”। इस अवसर पर महिलाओं की आर्थिक भागीदारी को समावेशी और टिकाऊ विकास की अनिवार्य शर्त बताया गया।
🌱 स्थानीय मूल्यों से जुड़ा विकास
अपने संबोधन में कल्पना मुर्मू सोरेन ने कहा कि झारखंड का विकास मॉडल राज्य के आदिवासी और स्वदेशी लोकाचार से प्रेरित है, जहाँ जल-जंगल-जमीन के साथ संबंध दोहन नहीं बल्कि संरक्षण और जिम्मेदारी पर आधारित है। उन्होंने आदिवासी और ग्रामीण महिलाओं द्वारा किए जा रहे ‘अदृश्य श्रम’—देखभाल, सामुदायिक सहयोग और पारिवारिक अर्थव्यवस्था—को समाज की बुनियाद बताते हुए उसे उचित पहचान देने पर बल दिया।
⚖️ समानता, गरिमा और अवसर

उन्होंने कहा कि झारखंड का दृष्टिकोण केवल कल्याणकारी योजनाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि महिलाओं की गरिमा, आत्मनिर्भरता और निर्णय-क्षमता को सशक्त बनाने पर केंद्रित है। विशेष रूप से गृहिणियों और अनौपचारिक क्षेत्र में कार्यरत महिलाओं के आत्मविश्वास को बढ़ाने के लिए नीतियाँ तैयार की गई हैं। “जब जड़ों को सींचा जाता है, तब भविष्य मजबूत बनता है”—इस रूपक के माध्यम से उन्होंने समावेशी विकास की परिकल्पना रखी।
🤝 स्वयं सहायता समूहों की सशक्त भूमिका
कल्पना मुर्मू सोरेन ने Jharkhand State Livelihood Promotion Society (JSLPS) के अंतर्गत संचालित महिला स्वयं सहायता समूहों (SHG) की उपलब्धियों पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि ये समूह स्थानीय उत्पादन, खाद्य प्रसंस्करण और लघु उद्यमों के माध्यम से महिलाओं को नेतृत्व और आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ा रहे हैं।
🏛️ मुख्यमंत्री का विज़न
उन्होंने कहा कि माननीय मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के नेतृत्व में झारखंड का शासन मॉडल संसाधनों से ऊपर ‘लोगों’ और आर्थिक आंकड़ों से ऊपर ‘जीवन की गुणवत्ता’ को प्राथमिकता देता है। अंत में उन्होंने वैश्विक भागीदारों को झारखंड के साथ जुड़ने और महिला-नेतृत्व वाले इस सामुदायिक विकास मॉडल का प्रत्यक्ष अनुभव करने के लिए आमंत्रित किया।