
रांची सिविल कोर्ट की न्यायिक दंडाधिकारी रांची-24 सुश्री ऋत्विका सिंह ने 20 जनवरी 2026 को एक अहम आदेश पारित करते हुए डॉक्टर जयति सिमलाई के खिलाफ आईपीसी की धारा 279 और 304A के तहत मुकदमा चलाने का फैसला सुनाया है।
अब डॉक्टर जयति सिमलाई पर तेज़ और लापरवाही से वाहन चलाने तथा लापरवाही से मृत्यु का कारण बनने को लेकर आपराधिक मुकदमा चलेगा। इस मामले में शिकायतकर्ता सोनू मुंडा की ओर से रांची सिविल कोर्ट के अधिवक्ता ईशान रोहन ने पैरवी की।
क्या है पूरा मामला?
यह घटना 2 मार्च 2022 की है। जानकारी के अनुसार, रिनपास में इलाजरत महिला मरीज तैरु निशा को तत्कालीन विभागाध्यक्ष, मनोचिकित्सा विभाग की डॉक्टर जयति सिमलाई की कार से धक्का लग गया था। हादसे में महिला गंभीर रूप से घायल हो गई थी, जिसके बाद उसे इलाज के लिए रिम्स में भर्ती कराया गया, जहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।
आरोप है कि डॉक्टर जयति सिमलाई महिला विभाग परिसर में तेज़ और लापरवाही से वाहन चला रही थीं और बाद में इस घटना को पेड़ से गिरने की घटना बताकर दबाने का प्रयास किया गया।
पुलिस जांच पर उठे सवाल
मामले की जानकारी मिलने पर सोनू मुंडा ने सीजेएम रांची न्यायालय में शिकायत वाद संख्या 6364/2022 दर्ज कराया। न्यायालय के निर्देश पर कांके थाना में कांड संख्या 198/2022 दर्ज कर अनुसंधान किया गया।
हालांकि पुलिस ने बिना गवाहों के बयान लिए ही साक्ष्य के अभाव का हवाला देते हुए डॉक्टर जयति सिमलाई को निर्दोष बताते हुए अंतिम प्रतिवेदन सौंप दिया। इस रिपोर्ट को सोनू मुंडा ने न्यायालय में चुनौती दी।
कोर्ट का सख्त रुख
अधिवक्ता ईशान रोहन द्वारा प्रस्तुत गवाहों के बयान और तथ्यों के आधार पर न्यायालय ने डॉक्टर जयति सिमलाई के खिलाफ मुकदमा चलाने की अनुमति दे दी है।
गौरतलब है कि वर्तमान में डॉक्टर जयति सिमलाई प्राध्यापक नहीं होने के बावजूद रिनपास की प्रभारी निदेशक के पद पर नियुक्त हैं। ऐसे में उनके पद पर बने रहने से मुकदमे की निष्पक्षता पर भी सवाल उठ रहे हैं।