
रांची: डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी विश्वविद्यालय (DSPMU) में छात्र हितों से जुड़े विभिन्न शैक्षणिक एवं प्रशासनिक मुद्दों को लेकर गुरुवार को विश्वविद्यालय के प्रमुख छात्र संगठनों की संयुक्त बैठक आयोजित की गई। बैठक में विश्वविद्यालय परिसर में व्याप्त समस्याओं पर गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए छात्र संगठनों ने संयुक्त आंदोलन की घोषणा की और विश्वविद्यालय प्रशासन को अपनी 9 सूत्री मांगों पर कार्रवाई के लिए 24 घंटे का अल्टीमेटम दिया।
इस संयुक्त आंदोलन में आदिवासी छात्र संघ, आजसू छात्र संघ (AJSU), NSUI, झामुमो छात्र संगठन, हिंदू छात्र संघ, ABVP, SSAI और AISA सहित कई छात्र संगठन शामिल हुए।
छात्र संगठनों ने अपनी मांगों में विश्वविद्यालय में जारी पेन डाउन आंदोलन समाप्त कर शैक्षणिक गतिविधियां सामान्य करने, NET, Ph.D. और JRF से जुड़ी लंबित समस्याओं का समाधान, शिक्षकों की नियुक्ति, बायोमेट्रिक उपस्थिति प्रणाली लागू करने, शिकायत निवारण तंत्र स्थापित करने तथा BBA, MBA, कंप्यूटर साइंस, वाणिज्य एवं जनजातीय भाषाओं में सीट कटौती वापस लेने जैसी प्रमुख मांगें रखीं।
आदिवासी छात्र संघ के अध्यक्ष विवेक तिर्की ने कहा कि शिक्षकों की कमी और क्षेत्रीय भाषाओं की सीटों में कटौती से छात्रों का भविष्य प्रभावित हो रहा है, जिसे किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि यदि छात्र हितों की अनदेखी जारी रही तो सभी छात्र संगठन मिलकर आंदोलन को और तेज करेंगे।
आजसू छात्र संघ के प्रदेश कार्यकारी अध्यक्ष बबलू महतो ने भी सीट कटौती और शिक्षकों की कमी पर नाराजगी जताते हुए विश्वविद्यालय प्रशासन से तत्काल कार्रवाई की मांग की।
NSUI के जिला अध्यक्ष सतीश केशरी ने कहा कि छात्र हितों की लड़ाई में उनका संगठन हर स्तर पर संघर्ष करेगा। वहीं झामुमो छात्र संगठन के प्रेम प्रतीक केशरी ने झारखंड की स्थानीय एवं जनजातीय भाषाओं के संरक्षण और संवर्धन के लिए लगातार आंदोलन जारी रखने की बात कही।
छात्र नेताओं ने विश्वविद्यालय प्रशासन को 24 घंटे का समय देते हुए चेतावनी दी कि यदि निर्धारित अवधि के भीतर मांगों पर सकारात्मक कार्रवाई नहीं की गई, तो सभी संगठन मिलकर लोकतांत्रिक और चरणबद्ध आंदोलन शुरू करेंगे। उन्होंने कहा कि इसकी पूरी जिम्मेदारी विश्वविद्यालय प्रशासन की होगी।
बैठक के अंत में छात्र प्रतिनिधियों ने कहा कि यह संघर्ष किसी एक संगठन का नहीं, बल्कि विश्वविद्यालय के प्रत्येक विद्यार्थी के अधिकार, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और संस्थान की गरिमा की रक्षा के लिए है।