
रांची: परिसीमन में अनुसूचित जनजाति (ST) की आरक्षित सीटों में संभावित कटौती और आगामी जनगणना में पृथक सरना धर्म कोड को शामिल करने की मांग को लेकर आदिवासी छात्र संघ ने अपना कड़ा रुख जाहिर किया है। संघ के केंद्रीय अध्यक्ष सुशील उराँव के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने झारखंड से राज्यसभा सांसद एवं भाजपा प्रदेश अध्यक्ष आदित्य प्रसाद साहू से उनके ओरमांझी स्थित पैतृक आवास पर मुलाकात कर ज्ञापन सौंपा।
ज्ञापन में संगठन ने कहा कि झारखंड राज्य का गठन आदिवासियों और मूलवासियों के लंबे संघर्ष का परिणाम है। ऐसे में केवल वर्तमान जनसंख्या के आधार पर परिसीमन के दौरान ST आरक्षित सीटों में किसी भी प्रकार की कमी संविधान की पाँचवीं अनुसूची और पेसा (PESA) कानून की भावना के विपरीत होगी।
राँची विश्वविद्यालय अध्यक्ष मनोज उराँव ने कहा कि आदिवासी समाज एक ओर विस्थापन और दूसरी ओर जनसांख्यिकीय बदलाव की चुनौती का सामना कर रहा है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि परिसीमन में आदिवासी प्रतिनिधित्व घटाया गया तो संगठन राज्यव्यापी और देशव्यापी आंदोलन करने को मजबूर होगा।

वहीं, केंद्रीय कोषाध्यक्ष सह संयोजक डॉ. जलेश्वर भगत ने आगामी राष्ट्रीय जनगणना में पृथक सरना धर्म कोड लागू करने की मांग दोहराई। उनका कहना था कि अलग धर्म कोड नहीं होने से प्रकृति पूजक आदिवासियों की वास्तविक जनसंख्या का सही आकलन नहीं हो पाता, जिससे उनके अधिकार और कल्याणकारी योजनाएं प्रभावित होती हैं।
संगठन की प्रमुख मांगें
झारखंड की वर्तमान 28 ST आरक्षित विधानसभा सीटों और सभी ST आरक्षित लोकसभा सीटों को सुरक्षित रखा जाए।
अनुसूचित क्षेत्रों में प्रतिनिधित्व तय करने के लिए 1971 की जनगणना आधारित संवैधानिक संतुलन को आधार बनाया जाए।
आगामी जनगणना में पृथक सरना धर्म कोड शामिल किया जाए।
सादा पट्टा के आधार पर गैर-मजरूआ और आदिवासी जमीनों पर हुए अवैध कब्जों की जांच कर कार्रवाई की जाए।

सांसद आदित्य प्रसाद साहू का आश्वासन
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष एवं राज्यसभा सांसद आदित्य प्रसाद साहू ने प्रतिनिधिमंडल की मांगों को गंभीरता से सुनते हुए आश्वासन दिया कि वे आदिवासी समाज के संवैधानिक अधिकारों, राजनीतिक प्रतिनिधित्व और सांस्कृतिक पहचान से जुड़े मुद्दों को केंद्र सरकार एवं संबंधित मंत्रालयों के समक्ष उठाएंगे।
इस दौरान आदिवासी छात्र संघ के कई पदाधिकारी और कार्यकर्ता भी मौजूद रहे।
