झारखंड में ‘पलाश शहद’ की बाजार में एंट्री, मंत्री दीपिका पांडेय सिंह ने किया शुभारंभ

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रांची: झारखंड राज्य आजीविका संवर्धन सोसाइटी (JSLPS) ने राज्य में शहद उत्पादन को नई पहचान देने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए ‘पलाश शहद’ बाजार श्रृंखला का शुभारंभ किया है। रांची जिले के इटकी प्रखंड स्थित लुपुंग गांव में आयोजित कार्यक्रम में राज्य की ग्रामीण विकास, ग्रामीण कार्य एवं पंचायती राज मंत्री दीपिका पांडेय सिंह ने पलाश शहद के तीन उत्पादों – मेलिफेरा हनी, सेराना प्रीमियम हनी और फॉरेस्ट हनी – को औपचारिक रूप से लॉन्च किया।


कार्यक्रम में JSLPS के मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी (CEO) अनन्य मित्तल भी उपस्थित रहे। यह पहल झारखंड मधु आजीविका किसान उत्पादक कंपनी लिमिटेड (FPO) से जुड़ी ग्रामीण महिलाओं द्वारा JSLPS के सहयोग से शुरू की गई है।


कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मंत्री दीपिका पांडेय सिंह ने कहा कि झारखंड के जंगलों और ग्रामीण क्षेत्रों में तैयार होने वाला प्राकृतिक एवं शुद्ध शहद अपनी अलग पहचान रखता है। उन्होंने कहा कि आज बाजार में मिलावटी उत्पादों की भरमार है, ऐसे में पलाश शहद उपभोक्ताओं को शुद्धता और गुणवत्ता का भरोसा देगा।


उन्होंने कहा कि कृषि के साथ मधुमक्खी पालन ग्रामीण महिलाओं के लिए आय बढ़ाने का प्रभावी साधन बन सकता है और इससे गांवों से होने वाले पलायन को भी कम किया जा सकता है। सरकार द्वारा महिलाओं को मधुमक्खी पालन के लिए प्रशिक्षण और बी-बॉक्स उपलब्ध कराए जा रहे हैं, जबकि कई महिलाएं स्वयं निवेश कर इस व्यवसाय को आगे बढ़ा रही हैं।


मंत्री ने कहा कि राज्य सरकार महिलाओं को स्वरोजगार से जोड़ने के लिए लगातार प्रयासरत है और मधुमक्खी पालन इस दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल साबित हो सकती है।
JSLPS के CEO अनन्य मित्तल ने कहा कि मधुमक्खी पालन से जुड़ी महिलाओं का उत्साह प्रेरणादायक है। उन्होंने बताया कि भविष्य में इस परियोजना से 9 हजार महिलाओं को जोड़ने की योजना है। इसके साथ ही शहद से जुड़े अन्य मूल्यवर्धित उत्पादों के उत्पादन पर भी काम किया जाएगा।


जानकारी के अनुसार, झारखंड मधु आजीविका किसान उत्पादक कंपनी लिमिटेड ने 29 अप्रैल से 31 मई 2026 के बीच 500 बी-बॉक्स के माध्यम से लगभग 1 मीट्रिक टन शहद का उत्पादन किया है।

वर्तमान में रांची, खूंटी, सिमडेगा और लातेहार जिलों के 10 प्रखंडों में महिलाओं को विशेष प्रशिक्षण देकर मधुमक्खी पालन कराया जा रहा है। प्रत्येक महिला को विभाग की ओर से दो-दो बी-बॉक्स उपलब्ध कराए गए हैं।


JSLPS का लक्ष्य वित्तीय वर्ष 2026-27 में शहद उत्पादन और विपणन के माध्यम से 13 करोड़ रुपये का व्यवसायिक लेन-देन करना है। ग्रामीण महिलाओं की भागीदारी, वैज्ञानिक प्रशिक्षण और बेहतर विपणन रणनीति के साथ ‘पलाश शहद’ को झारखंड की नई पहचान बनाने की दिशा में प्रयास तेज कर दिए गए हैं।

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