
रांची, 7 जुलाई 2026: राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग (NCST) की सदस्य डॉ. आशा लकड़ा ने सोमवार को रांची के न्यू सर्किट हाउस में कुल 15 मामलों की सुनवाई की। इस दौरान कांके प्रखंड के नगड़ी में प्रस्तावित RIMS-2 परियोजना से जुड़े 222 एकड़ भूमि अधिग्रहण मामले पर विस्तृत सुनवाई हुई।

सुनवाई के दौरान शिकायतकर्ता ने आयोग के समक्ष अपना पक्ष रखा, जबकि संबंधित अधिकारियों ने अधिगृहित 222 एकड़ भूमि और रैयतों की सूची आयोग को सौंपी। हालांकि अधिकारी यह स्पष्ट नहीं कर सके कि अब तक कितने रैयतों को मुआवजा राशि का भुगतान किया गया है।
आयोग ने संबंधित विभागीय अधिकारियों को निर्देश दिया कि एक महीने के भीतर सभी मुआवजा प्राप्त रैयतों की विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत की जाए। साथ ही आयोग ने स्पष्ट निर्देश दिया कि जब तक इस मामले की सुनवाई आयोग में जारी है, तब तक अधिगृहित भूमि पर RIMS-2 से संबंधित किसी भी प्रकार का निर्माण कार्य नहीं किया जाए।

डॉ. आशा लकड़ा ने कहा कि प्रस्तावित भूमि उपजाऊ है और अनेक रैयतों की आजीविका का प्रमुख स्रोत है। उन्होंने सुझाव दिया कि राज्य सरकार RIMS-2 के निर्माण के लिए बंजर या परती भूमि का चयन करे। साथ ही उन्होंने राज्य के सिमडेगा, खूंटी, पूर्वी सिंहभूम, पश्चिमी सिंहभूम, गुमला, चैनपुर और डुमरी जैसे क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने की आवश्यकता भी बताई।

सुनवाई के दौरान बोकारो जिले के वैध कारो क्षेत्र में वन विभाग और जिला प्रशासन द्वारा लाखों पेड़ काटे जाने के मामले पर भी आयोग ने गंभीर रुख अपनाया। आयोग ने कहा कि जांच पूरी होने तक संबंधित क्षेत्र में खनन कार्य पर रोक लगाई जाए।

इसके अलावा नामकुम थाना क्षेत्र में भूमि पर कथित अवैध कब्जे के मामले में संबंधित अधिकारियों को जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करने का निर्देश दिया गया। वहीं रांची शहरी क्षेत्र में सरना पूजा स्थल, भुईहरि और बकाश्त भूमि की खरीद-बिक्री से जुड़े मामलों की भी जांच कर नियमानुसार कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए।
