RINPAS ने मनाया 101वां स्थापना दिवस, ‘आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस’ पर हुई अकादमिक कार्यशाला

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रांची, 4 सितंबर 2026। रांची इंस्टीट्यूट ऑफ न्यूरो-साइकियाट्री एंड अलाइड साइंसेज (RINPAS), कांके ने शुक्रवार को अपना 101वां स्थापना दिवस जे.ई. धुंजीभॉय अकादमिक एवं रिसर्च सेंटर में हर्षोल्लास और गरिमामय वातावरण में मनाया। कार्यक्रम में प्रतिष्ठित मनोचिकित्सकों, मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों, शोधकर्ताओं, चिकित्सकों, प्रशासकों और मीडिया प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया।
स्थापना दिवस समारोह में RINPAS की 100 वर्षों से अधिक की सेवा और उपलब्धियों को याद करने के साथ-साथ मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के संभावित उपयोग पर भी विस्तार से चर्चा हुई।


कार्यक्रम की शुरुआत अतिथियों के स्वागत और अभिनंदन के साथ हुई। इसके बाद राष्ट्रीय गीत और राष्ट्रगान का सामूहिक गायन किया गया। प्रो. (डॉ.) अमूल रंजन सिंह ने स्वागत भाषण देते हुए RINPAS की ऐतिहासिक विरासत और संस्थान को आकार देने वाले लोगों के योगदान को याद किया। उन्होंने कहा कि AI को चिकित्सा क्षेत्र में सहायक तकनीक के रूप में इस्तेमाल किया जाना चाहिए, लेकिन इसे चिकित्सकीय सोच, आलोचनात्मक चिंतन और नैदानिक निर्णय का विकल्प नहीं बनाया जा सकता।
इसके बाद दीप प्रज्ज्वलन और स्मारिका विमोचन किया गया। समारोह में विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट कार्य और योगदान के लिए पुरस्कार एवं सम्मान भी प्रदान किए गए।


चिकित्सा अधीक्षक डॉ. विनोद कुमार महतो ने RINPAS की ऐतिहासिक यात्रा पर प्रकाश डालते हुए बताया कि संस्थान की शुरुआत मुंगेर, बिहार में प्रथम मानसिक अस्पताल के रूप में हुई थी और आज यह कांके में मानसिक स्वास्थ्य के क्षेत्र का एक प्रमुख संस्थान बन चुका है। उन्होंने संस्थान के 101वें स्थापना दिवस पर पूरे RINPAS परिवार को बधाई दी।
वहीं, उप निदेशक मिथिलेश कुमार चौधरी ने कहा कि RINPAS का विकास सर्वोच्च न्यायालय, राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) और झारखंड सरकार के स्वास्थ्य, चिकित्सा शिक्षा एवं परिवार कल्याण विभाग के दिशा-निर्देशों के अनुरूप किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि बदलती तकनीकी दुनिया के साथ कदम मिलाने के लिए संस्थान को AI को स्मार्ट और प्रभावी तरीके से अपनाना होगा।


RINPAS की निदेशक डॉ. जयति सिमलाई ने रोगी-केंद्रित स्वास्थ्य सेवाओं के प्रति संस्थान की प्रतिबद्धता को दोहराया। उन्होंने संस्थान की हाल की उपलब्धियों में नवस्थापित डीप ट्रांसक्रेनियल मैग्नेटिक स्टिमुलेशन (dTMS) सुविधा और वर्ष 2026 में आयोजित डि-एडिक्शन मैराथन का उल्लेख किया। उन्होंने उम्मीद जताई कि RINPAS अपने दूसरे शताब्दी वर्ष में नई उपलब्धियों के साथ आगे बढ़ेगा।


उद्घाटन सत्र के समापन पर आयोजन सचिव एवं मनोरोग सामाजिक कार्य विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ. मनीषा किरण ने सभी अतिथियों और सहयोगियों के प्रति आभार जताया। उन्होंने कहा कि AI पर आयोजित अकादमिक कार्यशाला 21वीं सदी की जरूरतों के अनुरूप RINPAS के लिए भविष्य की रणनीति तैयार करने में महत्वपूर्ण साबित होगी।


AI पर हुई विशेष अकादमिक कार्यशाला
चाय अवकाश के बाद “Artificial Intelligence in RINPAS” विषय पर विशेष अकादमिक कार्यशाला आयोजित की गई। सत्र की अध्यक्षता डॉ. सुभाष सोरेन, डॉ. मसूर जहाँ और डॉ. मनीषा किरण ने की।
कार्यशाला में मनोचिकित्सा, क्लिनिकल साइकोलॉजी, मनोरोग सामाजिक कार्य, दंत चिकित्सा और OPD प्रबंधन में AI के संभावित उपयोग पर प्रस्तुतियां दी गईं।


डॉ. रमेश हेम्ब्रम ने “मनोचिकित्सा में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस: क्लिनिकल इनोवेशन से AI-सक्षम RINPAS तक” विषय पर प्रस्तुति दी। वहीं राजाराम पी. ने क्लिनिकल साइकोलॉजी में AI के क्रियान्वयन की संभावनाओं पर चर्चा की।


सुदीप्तो राजक ने मनोरोग सामाजिक कार्य में AI के अनुप्रयोग और AI-सक्षम मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं पर प्रस्तुति दी। डॉ. अविनाश हाजरा ने दंत चिकित्सा में AI के उपयोग, जबकि मो. इम्तियाज अहमद ने OPD प्रबंधन में AI के इस्तेमाल की संभावनाओं पर जानकारी साझा की।
सभी प्रस्तुतियों के बाद इंटरैक्टिव प्रश्नोत्तर सत्र आयोजित हुआ, जिसमें प्रतिभागियों ने अपने सवाल और सुझाव रखे। सत्र के अध्यक्षों ने प्रस्तुत विषयों पर आवश्यक मार्गदर्शन भी दिया।


कार्यक्रम का समापन केक कटिंग समारोह के साथ हुआ। इसके बाद RINPAS परिवार के सदस्यों के लिए बड़ाखाना का आयोजन किया गया।

इस तरह RINPAS का 101वां स्थापना दिवस संस्थान की गौरवशाली विरासत, वर्तमान उपलब्धियों और भविष्य में तकनीक एवं आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के माध्यम से मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं को और आधुनिक एवं प्रभावी बनाने के संकल्प के साथ संपन्न हुआ।

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