
रांची: राज्य के विभिन्न कर्मचारी संगठनों के महासंघ ने मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन से लंबित मांगों पर शीघ्र निर्णय लेने की अपील की है। महासंघ का कहना है कि झारखंड में कई संवर्गों के कर्मचारियों का ग्रेड पे, संशोधित वेतनमान, परिवहन भत्ता और शिक्षण भत्ता वर्षों से लंबित है, जिससे कर्मचारियों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।
महासंघ के अनुसार, सहकारिता प्रसार पदाधिकारी सहित कई निरीक्षकीय संवर्गों को वर्ष 2016 से 4600 रुपये ग्रेड पे के स्थान पर 4200 रुपये ग्रेड पे दिया जा रहा है। वहीं, संशोधित वेतनमान में भी केंद्र सरकार के अनुरूप लाभ नहीं मिलने का आरोप लगाया गया है। संगठन ने कहा कि बिहार सरकार अपने कर्मचारियों को वर्ष 2017 से यह लाभ दे चुकी है, जबकि झारखंड में अब तक इस पर निर्णय नहीं लिया गया है।
महासंघ ने यह भी कहा कि मुख्यमंत्री के निर्देश पर कार्मिक विभाग, वित्त विभाग और संबंधित विभागों को कई बार पत्र भेजे गए, लेकिन वर्षों बाद भी उन पर कार्रवाई नहीं हुई। संगठन का आरोप है कि सरकार उच्च पदों पर कार्यरत कुछ संवर्गों को तो लाभ दे रही है, लेकिन क्षेत्रीय कर्मचारियों की मांगों की लगातार अनदेखी की जा रही है।
प्रेस विज्ञप्ति में जेएसएलपीएस (JSLPS) में कार्यरत ऑफिस बॉय का मानदेय बढ़ाकर न्यूनतम 25 हजार रुपये करने, डाटा एंट्री ऑपरेटर (DEO) को मानव संसाधन नियमावली के लेवल-7 में शामिल कर न्यूनतम 41,500 रुपये वेतन देने तथा स्वास्थ्य विभाग के एमपीडब्ल्यू कर्मियों के स्थायी समायोजन की भी मांग की गई है।
इसके अलावा महासंघ ने राज्य के सभी संविदाकर्मियों, दैनिक वेतनभोगी और आउटसोर्सिंग कर्मियों के स्थायी समायोजन तथा महासंघ द्वारा सौंपे गए 21 सूत्री मांगपत्र को तत्काल लागू करने की मांग दोहराई। संगठन ने यह भी कहा कि कई संविदा, दैनिक वेतनभोगी और आउटसोर्सिंग कर्मियों का 5 से 6 महीने से वेतन लंबित है, जिसे जल्द जारी किया जाना चाहिए।
महासंघ के महामंत्री सुनील कुमार साह, अध्यक्ष देव नारायण सिंह मुंडा, संरक्षक गणेश प्रसाद सिंह, सम्मानित अध्यक्ष मुक्तेश्वर लाल सहित कई पदाधिकारियों ने मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन से कर्मचारियों की लंबित मांगों पर शीघ्र निर्णय लेने का आग्रह किया है।