‘चुनाव आयोग वन-मैन शो बन गया’, ज्ञानेश कुमार को बर्खास्त करें: विनोद पांडेय
10 महीने में 14 आपत्तियां, चुनाव

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रांची। चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर सामने आई एक रिपोर्ट के बाद राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। झारखंड मुक्ति मोर्चा के केंद्रीय महासचिव विनोद कुमार पांडेय ने चुनाव आयोग को लेकर गंभीर सवाल उठाते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को बर्खास्त करने की मांग की है।
विनोद कुमार पांडेय ने कहा कि चुनाव आयोग तीन सदस्यों वाली संवैधानिक संस्था है और इसे किसी एक व्यक्ति का निजी कार्यालय नहीं बनाया जा सकता।


दरअसल, द इंडियन एक्सप्रेस की 23 सितंबर 2026 की जांच रिपोर्ट में दावा किया गया है कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में कम-से-कम 14 बार चुनाव आयोग के फैसलों और आदेशों को लेकर लिखित आपत्तियां दर्ज कीं। रिपोर्ट के मुताबिक, इन आपत्तियों में मतदाता सूची, नए मतदाताओं के पंजीकरण, नाम जोड़ने और हटाने तथा चुनावी डेटाबेस से जुड़े मुद्दे शामिल थे।


इसी रिपोर्ट का हवाला देते हुए विनोद पांडेय ने सवाल उठाया कि अगर दो चुनाव आयुक्त लगातार लिखित आपत्ति दर्ज करा रहे थे, तो उनकी आपत्तियों पर क्या कार्रवाई हुई और उनकी जानकारी के बिना फैसले कैसे लिए गए?


उन्होंने कहा कि यह केवल प्रशासनिक मतभेद का मामला नहीं है, बल्कि चुनाव आयोग की संस्थागत स्वतंत्रता, पारदर्शिता और विश्वसनीयता से जुड़ा सवाल है। पांडेय ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार से सार्वजनिक रूप से स्थिति स्पष्ट करने की मांग की।


SIR यानी Special Intensive Revision को लेकर भी विनोद पांडेय ने चुनाव आयोग पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि मतदाता सूची में बड़े पैमाने पर बदलाव, सॉफ्टवेयर के केंद्रीकरण और पात्र मतदाताओं के नाम जोड़ने में सामने आई कथित तकनीकी बाधाएं गंभीर विषय हैं।
उन्होंने कहा कि मतदाता सूची किसी सरकार की कृपा नहीं, बल्कि नागरिक के लोकतांत्रिक अधिकार की बुनियाद है। किसी भी पात्र नागरिक को मताधिकार से वंचित नहीं किया जाना चाहिए।

विनोद पांडेय ने कहा कि झामुमो ने शुरुआत से ही SIR के बजाय उसकी प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने महाराष्ट्र, बिहार और पश्चिम बंगाल में SIR को लेकर उठे सवालों का भी जिक्र किया और चुनाव आयोग की भूमिका पर जवाबदेही तय करने की मांग की।


उन्होंने सवाल किया कि 10 महीनों में 14 आपत्तियां क्यों आईं और क्या इन आपत्तियों की जानकारी प्रधानमंत्री और गृह मंत्री को थी? अगर जानकारी थी तो इस पर क्या कार्रवाई हुई?


विनोद पांडेय ने सुप्रीम कोर्ट से पूरे मामले का संज्ञान लेने की मांग करते हुए कहा कि चुनाव आयोग को ‘वन-मैन शो’ नहीं बनने दिया जा सकता। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग किसी सरकार या व्यक्ति की नहीं, बल्कि संविधान और देश के करोड़ों मतदाताओं की संस्था है।


हालांकि, रिपोर्ट के बाद चुनाव आयोग की ओर से यह सफाई भी सामने आई है कि SIR समेत आयोग के सभी फैसले तीनों चुनाव आयुक्तों की सहमति से लिए गए थे।

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