
20 सितंबर 2026 को पुरुलिया जिले के कोड़ाडीह मैदान में आयोजित करम महोत्सव में झारखंड, पश्चिम बंगाल और ओडिशा से बड़ी संख्या में कुड़मी/कुरमी समाज के लोग शामिल हुए। कार्यक्रम में पारंपरिक करम नृत्य, मांदर और ढोल-नगाड़ों के जरिए समाज की सांस्कृतिक एकजुटता दिखाई दी।
इसी दौरान अजीत प्रसाद महतो की ओर से आजसू सुप्रीमो सुदेश महतो को झारखंड का “एकमात्र कुड़मी/कुरमी नेता” बताए जाने के बाद समाज के भीतर नेतृत्व को लेकर चर्चा शुरू हो गई।
लेखक लक्ष्मीनारायण मुंडा ने अपने लेख में आरोप लगाया है कि सामाजिक आयोजन को राजनीतिक मंच में बदल दिया गया और कुड़मी/कुरमी समाज की मूल मांगें पीछे छूट गईं। लेख में एसटी दर्जा, कुड़माली भाषा को आठवीं अनुसूची में शामिल करने, जमीन-जंगल के अधिकार, शिक्षा और रोजगार जैसे मुद्दों को प्रमुख बताया गया है।

लेख में यह भी सवाल उठाया गया है कि करम महोत्सव में बड़ी संख्या में लोगों की मौजूदगी के बावजूद कुड़मी/कुरमी समाज की प्रमुख मांगों को लेकर कोई ठोस रास्ता सामने आया या नहीं।
वहीं, लेख के अंत में कुड़मी/कुरमी समुदाय को विशेष ओबीसी श्रेणी में शामिल कर अलग कोटा देने का सुझाव भी दिया गया है।
कुल मिलाकर, पुरुलिया का करम महोत्सव सांस्कृतिक एकजुटता के साथ-साथ कुड़मी/कुरमी समाज के राजनीतिक नेतृत्व और अधिकारों को लेकर नई बहस का विषय बन गया है।