रजिस्टर टू में रिकॉर्ड सही लेकिन पोर्टल पर गड़बड़ी, हाई कोर्ट ने CO को जांच व सुधार का दिया आदेश।

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ऑनलाइन खतियान में नाम गलत दर्ज होने के मामले में झारखंड हाईकोर्ट ने बड़ा आदेश दिया है, दरअसल कोर्ट ने गलत तरीके से दर्ज नाम में सुधार करने का निर्देश दिया है।

बताते चले कि अजित कुमार मुखर्जी एवं सरित कुमार मुखर्जी गोविंद मुखर्जी एवं सुरजू नारायण मुखर्जी का वंशज है जो की अंचल कार्यालय कसमार मौजा धधकिया, जिला- बोकारो का रहने वाला है।

आवेदक,सरित कुमार मुखर्जी
आवेदक,अजीत मुखर्जी

इन सभी का धधकिया मौजा में पुश्तानी ज़मीन है जिसका खाता न०- 54, प्लाट न०- 597, कुल रकुवा – 86 डिसमिल एवं प्लाट न०- 641, कुल रकुवा 2 एकड़ 79 डिसमिल जो की गोविंद मुखर्जी एवं सुरजू नारायण मुखर्जी के नाम से भोतिक मूल खतियान (ऑफलाइन रिकॉर्ड) पंजी-2 में दर्ज है, और इस ज़मीन का आजतक इनलोगों के बीच बटवारा नहीं हुआ हैं।

सहयोगी याचिकाकर्ता, प्रकाश मुखर्जी

हरिपदो मुखर्जी के वंसजो के द्वारा गलत तरीके से इस जमीन को अंचल कार्यालय कसमार से गड़बड़ी करते हुए, केवल सिर्फ हरिपदो मुखर्जी के नाम से पंजी-2 में दर्ज करवाया गया है।

वंशावली

गोविंद मुखर्जी एवं सुरजू नारायण मुखर्जी के वंशजो के द्वारा अनेक बार अंचल कार्यालय कसमार में शिकायत करने के बावजूद किसी तरह का संतोषप्रद जवाब अंचल कार्यालय के तरफ से न मिलने पर, विवश होकर झारखण्ड उच्च न्यायालय का दरवाज़ा खट खटाना पड़ा।

सुरजू नारायण मुखर्जी के वंशज श्री सरित कुमार मुखर्जी पिता- स्व. नरेन्द्र नाथ मुखर्जी एवं गोविंद मुखर्जी के वंसज श्री अजित कुमार मुखर्जी पिता- स्व. भुवेनेश्वर मुखर्जी के द्वारा उच्च न्यायालय में केस दर्ज किया जिसमे जस्टिस माननीय आनंद सेन के द्वारा ये आदेश पारित किया गया की भोतिक मूल खतियान (ऑफलाइन रिकॉर्ड) के सत्यापन करते हुए उसके आधार पर ऑनलाइन डिजिटल हरिपदो मुखर्जी का नाम दर्ज होने का जो भी गड़बड़ी हुआ है उसको खारिज करने का आदेश पारित किया गया आदेश पारित किया गया है और भौतिक मूल खतियान के आधार पर सूर्यनारायण मुखर्जी और गोविन्द मुखर्जी का नाम पंजी 2 जमाबंदी में नाम दर्ज करने का आदेश पारित किया गया।

सिद्धार्थ रंजन, अधिवक्ता ,झारखंड उच्च न्यायालय

कसमार अंचल कार्यालय के द्वारा गलत तरीके से हरिपदो मुखर्जी का ऑनलाइन में नाम दर्ज किया गया है इसमें सुधर करते हुए खाता न० 54, प्लाट न०- 597, कुल रकुवा 86 डिसमिल एवं प्लाट न०- 641, कुल रकुवा – 2 एकड़ 79 डिसमिल है, उसका भोतिक मूल खतियान (ऑफलाइन रिकॉर्ड) के आधार पर सुधर करते हुए आदेश पारित किया गया ।

झारखण्ड उच्च नायालय के नयायमूर्ति श्री आनंद सेन के द्वारा आदेश पारित करते हुए ये स्पष्ट रूप से ये कहा गया है की आवेदक इस आदेश का कॉपी लेकर 4 हफ्ता के अन्दर अंचल कार्यालय में बिधिबत जमा करे एवं अंचल कार्यालय कसमार के द्वारा इस आदेश का अनुपालन करते हुए 12 हफ्ता के अन्दर भोतिक मूल खतियान के आधार पर डिजिटल ऑनलाइन खतियान में गलत ढंग से हरिपदो मुखर्जी का नाम जो दर्ज हो गया है उसमे सुधार करने का आदेश पारित किया गया है।

खबर में बताते चले आपको कि ठीक इसी तरह की घटना लोहरदगा का कुरु अंचल कार्यालय में हुआ था जो की आवेदक रामप्रसाद भगत उर्फ रामप्रसाद उरांव से जुड़ा हुआ था उसको झारखण्ड उच्च न्यायालय के माननीय नयायमूर्ति श्री आनंद सेन जी ने 10.06.2026 को एक आदेश पारित करते हुए भोतिक मूल खतियान के आधार पर ऑनलाइन डिजिटल गड़बड़ी को सुधर करते हुए भोतिक मूल खतियान के आधार पर ज़माबंदी करने के आदेश पारित किया गया है।

इस पूरे प्रकरण पर कोर्ट ने 12 हफ्ता के अंदर का वक्त दिया है अगर नहीं इसे ठीक किया जाता है तो कोर्ट की अवहेलना इसे मानी जाएगी और कड़ी कार्रवाई की जा सकती है।

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