दशभुजा घर-घर में: माँ दुर्गा की पूजा के साथ घर की माँ का सम्मान भी जरूरी

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देवज्योति नाहा, डांस कोरियोग्राफर

रांची : नवरात्रि और दशहरा केवल माँ दुर्गा की पूजा-अर्चना के पर्व नहीं हैं, बल्कि नारी-शक्ति, त्याग, ममता और समर्पण के सम्मान का भी संदेश देते हैं। हम माँ दुर्गा की दस भुजाओं को शक्ति का प्रतीक मानकर नमन करते हैं, लेकिन क्या हम अपने घर में रहने वाली उस माँ के योगदान को भी उतना ही सम्मान देते हैं, जो अपने दो हाथों से पूरे परिवार का संसार सँभालती है।

डांस कोरियोग्राफर देवज्योति नाहा का मानना है कि घर की माँ सुबह सबसे पहले उठती है और रात में सबसे अंत में आराम करती है। बच्चों की देखभाल, भोजन बनाना, बुजुर्गों की सेवा और परिवार की जरूरतों को पूरा करना—वह हर जिम्मेदारी बिना किसी शिकायत के निभाती है। अपनी थकान और परेशानियों को पीछे रखकर वह अपनों के चेहरे पर मुस्कान लाने का प्रयास करती है।

लेकिन अक्सर उसके त्याग और मेहनत को हम उसका कर्तव्य मानकर नजरअंदाज कर देते हैं। हम मंदिरों में माँ दुर्गा के सामने दीप जलाते हैं, फूल चढ़ाते हैं और सुख-समृद्धि की कामना करते हैं। मगर घर लौटकर यदि हम अपनी माँ की भावनाओं को न समझें, उनकी बातों को अनसुना करें और उनके श्रम का सम्मान न करें, तो पूजा का वास्तविक संदेश अधूरा रह जाता है।

डांस कोरियोग्राफर देवज्योति नाहा

सच्ची आराधना केवल प्रतिमा के सामने सिर झुकाना नहीं, बल्कि अपने जीवन में नारी को सम्मान और समानता का अधिकार देना भी है।

इस दशहरा हमें केवल रावण के पुतले का दहन नहीं करना चाहिए, बल्कि अपने भीतर के अहंकार, उपेक्षा और भेदभाव को भी समाप्त करने का संकल्प लेना चाहिए। अपनी माँ के कामों में हाथ बँटाना, उनके स्वास्थ्य का ध्यान रखना, उनकी इच्छाओं को समझना और उन्हें आराम के साथ अपने सपने पूरे करने का अवसर देना भी हमारे कर्तव्यों में शामिल है।

माँ को केवल परिवार की जिम्मेदारियाँ निभाने वाली महिला नहीं, बल्कि अपनी इच्छाओं, भावनाओं और सपनों वाली एक स्वतंत्र व्यक्ति के रूप में भी देखना जरूरी है।

आइए, इस दशहरा माँ दुर्गा की पूजा के साथ अपने घर की माँ के चेहरे पर भी मुस्कान लाएँ। ऐसा समाज बनाएँ, जहाँ हर माँ को सम्मान, हर नारी को समान अधिकार और हर बेटी को अपने सपनों के साथ आगे बढ़ने का अवसर मिले।

क्योंकि माँ दुर्गा की शक्ति केवल मंदिरों में नहीं, बल्कि हर उस माँ में विद्यमान है, जो अपने दो हाथों से पूरे परिवार का संसार सँभालती है।

हमारा संकल्प:
“दुर्गा माँ की पूजा करें, घर की माँ का सम्मान करें।
नारी-शक्ति को पहचानें, प्रेम और समानता का दीप जलाएँ।”

दशभुजा घर-घर में — माँ का सम्मान हर घर में।

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