
रांची, 23 सितंबर 2026: रांची के जोड़ा तालाब स्थित निशा बैंक्वेट्स में बुधवार को राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर की 118वीं जयंती समारोह धूमधाम और हर्षोल्लास के साथ मनाई गई। कार्यक्रम में शहर के गणमान्य नागरिकों, जनप्रतिनिधियों और साहित्य प्रेमियों ने हिस्सा लिया। इस दौरान उपस्थित लोगों ने दिनकर जी के तैलचित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी।
समारोह को संबोधित करते हुए रांची की महापौर रौशनी खलखो ने कहा कि राष्ट्रकवि दिनकर की कविताएं राष्ट्रीय चेतना और स्वाभिमान का प्रतीक हैं। उन्होंने कहा कि दिनकर की कालजयी रचनाएं आज की युवा पीढ़ी तक पहुंचना जरूरी है, ताकि युवाओं को राष्ट्रभक्ति और सामाजिक दायित्वों की प्रेरणा मिल सके।
पूर्व विधायक डॉ. जीतू चरण राम ने कहा कि दिनकर की कविताओं में शोषित और वंचित वर्ग की आवाज दिखाई देती है। उनकी रचनाएं सामाजिक और वैचारिक बदलाव का सशक्त माध्यम रही हैं।

अशोक प्रधान ने कहा कि दिनकर ने अपनी ओजस्वी वाणी के माध्यम से राष्ट्र को जागृत करने का काम किया। वहीं पूर्व विधायक समरी लाल ने दिनकर को केवल कवि ही नहीं, बल्कि एक युगद्रष्टा बताया।
हिंदू जागरण मंच के प्रदेश अध्यक्ष विक्रम शर्मा ने कहा कि दिनकर किसी एक वर्ग के कवि नहीं थे, बल्कि पूरे जनमानस की आवाज थे। उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता आंदोलन के दौर में दिनकर की रचनाओं में विद्रोह और राष्ट्रीय चेतना दिखाई दी, जबकि स्वतंत्र भारत में उनका साहित्य सामाजिक चेतना और सृजनात्मकता का माध्यम बना।
सीमा शर्मा और रामाशीष सिंह ने भी दिनकर के जीवन, साहित्य, संघर्ष और राष्ट्र के प्रति उनके योगदान पर अपने विचार रखे। वक्ताओं ने कहा कि दिनकर का साहित्य आज भी समाज को प्रेरणा देने का काम करता है।
कार्यक्रम की अध्यक्षता अनिल सिंह ने की, जबकि मंच संचालन व्रजेश शर्मा ने किया। कार्यक्रम के समापन पर धर्मेंद्र चौधरी ने धन्यवाद ज्ञापन किया। आयोजन को सफल बनाने में रामाशीष सिंह, धनंजय सिंह और सौरभ कुमार की महत्वपूर्ण भूमिका रही।

समारोह में पार्षद प्रीति रंजन, सुजाता भैया, अशोक प्रधान, डॉ. अंजेश, रामकुमार चौधरी, शिव शंकर सिंह, रामानुज शर्मा, हरिनंदन शर्मा, गोपाल प्रसाद, बलराम सिंह, ललित ओझा, रणधीर सिंह, मनोज सिंह, सुनील शर्मा, प्रकाश चंद्र सिंह, नेहा कुमारी, त्रिपुरारी शर्मा, सुषमा कुमारी और डॉ. अंजना सहित कई गणमान्य लोग और साहित्य प्रेमी मौजूद रहे।
कार्यक्रम के दौरान दिनकर की रचनाओं और कविताओं का पाठ भी किया गया। अंत में उपस्थित लोगों ने राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर के साहित्यिक योगदान और विराट व्यक्तित्व को याद करते हुए उन्हें नमन किया।
