पेसा नियमावली में ग्राम सभा सर्वोच्च है और रहेगी : झामुमो महासचिव विनोद पांडेय

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झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के महासचिव विनोद पांडेय ने पेसा नियमावली को लेकर भाजपा और पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा द्वारा लगाए जा रहे आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए उन्हें निराधार, भ्रामक और राजनीतिक हताशा से प्रेरित बताया है।


विनोद पांडेय ने कहा कि भाजपा को आज आदिवासी हितों की चिंता हो रही है, जबकि उसके लंबे शासनकाल में न तो पेसा कानून को लागू करने की नीयत दिखी और न ही ग्राम सभाओं को उनका संवैधानिक अधिकार मिला। उन्होंने कहा कि वर्षों से लंबित इस संवैधानिक दायित्व को हेमंत सोरेन सरकार ने संविधान के दायरे में रहकर पूरा किया है।

झामुमो महासचिव ने कहा कि अर्जुन मुंडा स्वयं लंबे समय तक मुख्यमंत्री और केंद्र सरकार में मंत्री रहे, लेकिन उनके कार्यकाल में न तो पेसा के नियम बने और न ही ग्राम सभा को निर्णायक भूमिका मिली। आज वही भाजपा आदिवासी अधिकारों की दुहाई दे रही है, जो उसकी दोहरी राजनीति को उजागर करता है।


उन्होंने स्पष्ट किया कि पेसा नियमावली में ग्राम सभा की भूमिका को कमजोर नहीं बल्कि और अधिक मजबूत किया गया है। परंपरा, रूढ़ि और स्थानीय स्वशासन की भावना को संविधान के अनुरूप स्पष्ट और व्यावहारिक रूप दिया गया है। भाजपा जानबूझकर भ्रम फैलाकर आदिवासी समाज को गुमराह करने का प्रयास कर रही है, जबकि सच्चाई यह है कि ग्राम सभा सर्वोच्च थी, है और आगे भी रहेगी।


विनोद पांडेय ने कहा कि संवैधानिक प्रक्रिया से बनी नियमावली को “कोल्ड ब्लडेड मर्डर” कहना भाजपा की संवैधानिक अज्ञानता और राजनीतिक कुंठा को दर्शाता है। जो लोग वर्षों तक आदिवासी अधिकारों को दबाते रहे, उन्हें आज नैतिकता की बात करने का अधिकार नहीं है।


झामुमो ने दो टूक कहा कि पेसा नियमावली को लेकर रचनात्मक और सकारात्मक सुझावों का हमेशा स्वागत है, लेकिन राजनीतिक दुर्भावना से फैलाए जा रहे भ्रम और झूठे प्रचार को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

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