
रांची: केन्द्रीय सरना समिति की 55वीं वर्षगाँठ गुरुवार, 12 मार्च 2026 को रांची स्थित केन्द्रीय कार्यालय 13 R.I.T. बिल्डिंग, कचहरी परिसर में उत्साहपूर्वक मनाई गई। कार्यक्रम की शुरुआत पंखराज बाबा कार्तिक उराँव के चित्र पर माल्यार्पण कर की गई।
इस अवसर पर विभिन्न गाँव-मौजा से आए लोगों ने ढोल, मांदर और नगाड़ों की थाप पर पारंपरिक नृत्य-संगीत प्रस्तुत कर माहौल को सांस्कृतिक रंगों से भर दिया। कार्यक्रम का शुभारंभ केन्द्रीय सरना समिति के केन्द्रीय अध्यक्ष फूलचन्द तिर्की ने किया।
उन्होंने कहा कि पंखराज बाबा कार्तिक उराँव ने आदिवासी समाज की परंपरा और संस्कृति को बचाने तथा देशभर में आदिवासियों को एकजुट करने के उद्देश्य से अखिल भारतीय आदिवासी विकास परिषद का गठन किया था। इसके साथ ही धार्मिक, सामाजिक, सांस्कृतिक और आदिवासी हक-अधिकार की लड़ाई के लिए वर्ष 1970 में केन्द्रीय सरना समिति का गठन किया गया।
उन्होंने बताया कि वर्ष 1970 से केन्द्रीय सरना समिति की अगुवाई में सरहुल शोभायात्रा निकाली जा रही है। इस शोभायात्रा ने आदिवासी समाज को एकजुट करने के साथ-साथ उनकी परंपरा और संस्कृति को देश-दुनिया में पहचान दिलाने का काम किया है। आज सरहुल शोभायात्रा को विश्व में पाँचवां स्थान प्राप्त है।

कार्यक्रम में समिति के प्रवक्ता ने कहा कि सरहुल जैसे पारंपरिक पर्वों में डीजे पर प्रतिबंध लगाने की आवश्यकता है, ताकि ढोल, नगाड़ा और मांदर की पारंपरिक संस्कृति जीवित रह सके। उन्होंने कहा कि सरहुल केवल एक पर्व नहीं, बल्कि प्रकृति और मनुष्य के अटूट प्रेम का प्रतीक है।
आज जब पूरी दुनिया पर्यावरण संकट से जूझ रही है, तब हमारी सदियों पुरानी ‘सखुआ और सूप’ की पूजा प्रकृति संरक्षण का सबसे बड़ा संदेश देती है। केन्द्रीय सरना समिति का संकल्प है कि इस पावन विरासत और पुरखों की परंपरा को आधुनिकता के शोर में खोने नहीं दिया जाएगा, बल्कि इसे गर्व के साथ वैश्विक स्तर पर और ऊंचाइयों तक पहुंचाया जाएगा।
कार्यक्रम में केन्द्रीय सरना समिति के वरीय उपाध्यक्ष प्रमोद एक्का, रांची जिला सरना समिति के अध्यक्ष अमर तिर्की, अमित टोप्पो, सोहन कच्छप, विमल कच्छप, अजय लिंडा, शिवा नायक, विनय उराँव, पंचम तिर्की, राधा हेमरोम सहित कई लोग उपस्थित रहे।