
रांची, 21 मार्च 2026 : झारखंड में 9 वर्षों से लंबित शिक्षक पात्रता परीक्षा (JTET) और भाषाई मुद्दे को लेकर झारखंड प्रशिक्षित शिक्षक संघ ने अपनी कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। संघ के छात्र नेता सह प्रदेश अध्यक्ष चंदन कुमार ने इस संबंध में राज्यसभा सांसद एवं भाजपा प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू द्वारा मुख्यमंत्री को लिखे गए पत्र पर स्पष्ट रुख सामने रखा।
संघ ने कहा कि झारखंड की पहचान उसकी सांस्कृतिक और भाषाई विविधता में निहित है। राज्य की नौ क्षेत्रीय और जनजातीय भाषाएं—संथाली, मुंडारी, हो, खड़िया, कुड़ुख, नागपुरी, कुरमाली, खोरठा और पंचपरगनिया—यहां की मूल पहचान का आधार हैं, जिनके संरक्षण के लिए लंबे समय तक संघर्ष किया गया है।

प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया कि JTET परीक्षा के संदर्भ में ऐसी किसी भी मांग को स्वीकार नहीं किया जाएगा, जो राज्य की भाषाई मौलिकता और सांस्कृतिक स्वरूप को प्रभावित करती हो। संघ ने जोर देकर कहा कि नियुक्तियों और प्रतियोगी परीक्षाओं में स्थानीय भाषाओं को प्राथमिकता देना पूरी तरह न्यायसंगत और संवैधानिक भावना के अनुरूप है।
संघ ने अन्य राज्यों का उदाहरण देते हुए कहा कि देशभर में सरकारी नौकरियों और शिक्षा में स्थानीय भाषा को प्राथमिकता दी जाती है। जैसे तमिलनाडु में तमिल, कर्नाटक में कन्नड़, महाराष्ट्र में मराठी और असम में असमिया भाषा को अनिवार्य महत्व दिया जाता है।
संघ ने दोहराया कि सभी भाषाओं का सम्मान किया जाना चाहिए, लेकिन झारखंड की क्षेत्रीय और जनजातीय भाषाओं के अधिकारों से किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार्य नहीं होगा। उन्होंने चेतावनी दी कि भाषाई अतिक्रमण राज्य की पहचान और सामाजिक संतुलन को प्रभावित कर सकता है।
अंत में संघ ने राज्य सरकार से मांग की कि JTET परीक्षा की नियमावली और सिलेबस को जल्द अंतिम रूप देकर परीक्षा का आयोजन कराया जाए, ताकि लाखों अभ्यर्थियों का भविष्य सुरक्षित हो सके।
