रांची विधानसभा में Cybersecurity & AI Awareness Workshop का आयोजन, स्पीकर रवींद्रनाथ महतो ने डिजिटल सुरक्षा पर दिया जोर

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रांची: झारखंड की राजधानी रांची स्थित पुराना विधानसभा सभागार में शनिवार को Cybersecurity & AI Awareness Workshop का सफल आयोजन किया गया। यह कार्यशाला The Asia Foundation, Bal Kalyan Sangh एवं CyberPeace के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित की गई। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य विधानसभा सदस्यों एवं अधिकारियों को साइबर सुरक्षा, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (Artificial Intelligence – AI) के सुरक्षित एवं जिम्मेदार उपयोग तथा डिजिटल युग में तेजी से बढ़ रहे साइबर खतरों के प्रति जागरूक करना था।


कार्यक्रम में झारखंड विधानसभा के माननीय अध्यक्ष श्री रवींद्रनाथ महतो मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि आज के डिजिटल दौर में साइबर सुरक्षा केवल तकनीकी विषय नहीं रह गया है, बल्कि यह लोकतंत्र, सुशासन और नागरिकों की सुरक्षा से सीधे जुड़ा हुआ एक महत्वपूर्ण विषय बन चुका है।


उन्होंने कहा कि देश और दुनिया तेजी से डिजिटल तकनीकों को अपना रहे हैं। ऐसे समय में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) विकास, प्रशासनिक सुधार और जनसेवा के क्षेत्र में नई संभावनाएँ लेकर आई है। हालांकि, AI का उपयोग सुरक्षित, जिम्मेदार और नैतिक तरीके से किया जाना भी उतना ही आवश्यक है, ताकि समाज को इसका अधिकतम लाभ मिल सके और इसके दुरुपयोग से बचा जा सके।


जनप्रतिनिधियों को डिजिटल सुरक्षा की जानकारी होना जरूरी


विधानसभा अध्यक्ष रवींद्रनाथ महतो ने कहा कि जनप्रतिनिधियों की भूमिका केवल कानून बनाने तक सीमित नहीं है, बल्कि उन्हें नई तकनीकों, साइबर अपराधों के बदलते स्वरूप, डेटा सुरक्षा और ऑनलाइन धोखाधड़ी जैसे विषयों की भी जानकारी होनी चाहिए। इससे वे स्वयं सुरक्षित रहेंगे और आम नागरिकों को भी जागरूक कर सकेंगे।


उन्होंने कहा कि इस प्रकार की जागरूकता कार्यशालाएँ जनप्रतिनिधियों की क्षमता वृद्धि के साथ-साथ एक सुरक्षित और डिजिटल रूप से सशक्त समाज के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।


विशेषज्ञों ने साझा किए महत्वपूर्ण अनुभव


कार्यशाला के दौरान साइबर सुरक्षा और डिजिटल तकनीक से जुड़े विशेषज्ञों ने विभिन्न विषयों पर विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि किस प्रकार साइबर अपराधी नई-नई तकनीकों का इस्तेमाल कर लोगों को निशाना बना रहे हैं और उनसे बचाव के लिए किन सावधानियों को अपनाना आवश्यक है।


विशेषज्ञों ने डेटा गोपनीयता (Data Privacy), ऑनलाइन फ्रॉड, फिशिंग अटैक, सोशल मीडिया सुरक्षा, डिजिटल पहचान की सुरक्षा, सुरक्षित पासवर्ड, मल्टी-फैक्टर ऑथेंटिकेशन (MFA) तथा AI के जिम्मेदार उपयोग जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से चर्चा की।


डिजिटल युग में जागरूकता ही सबसे बड़ा सुरक्षा कवच
कार्यक्रम में इस बात पर विशेष जोर दिया गया कि साइबर अपराधों से बचाव के लिए तकनीक के साथ-साथ जागरूकता भी अत्यंत आवश्यक है। यदि नागरिक और जनप्रतिनिधि डिजिटल सुरक्षा के मूलभूत नियमों का पालन करें तो अधिकांश साइबर हमलों और ऑनलाइन ठगी से बचा जा सकता है।

कार्यक्रम में झारखंड विधानसभा के माननीय सदस्य, वरिष्ठ अधिकारी एवं अन्य गणमान्य लोग बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। कार्यशाला का समापन डिजिटल सुरक्षा के प्रति सामूहिक जागरूकता बढ़ाने और सुरक्षित डिजिटल भविष्य के संकल्प के साथ हुआ।

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